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आत्म-विश्वास की पहचान

आत्म-विश्वास की पहचान

(मंचीय गेय कविता)
✍️ डॉ रवि शंकर मिश्र "राकेश"

आत्म-विश्वास की पहचान है,
ये जीवन का उजियारा है,
जो खुद में अडिग खड़ा रहे,
वही सच्चा सितारा है।

जो मन के संतुलन को साधे,
ना डोले आंधी-पानी में,
दुनिया लाख परेशान करे,
पर टिके रहे वह कहानी में।
तूफानों से जो न घबराए,
साहस जिसका सहारा है,
आत्म-विश्वास की पहचान है,
वही जीवन का तारा है।।

निर्णय ले जो दृढ़ता से,
फिर पीछे मुड़कर ना देखे,
अपनी राह स्वयं गढ़ता,
किस्मत से भी आगे लेखे।
ठान लिया जो कर जाना है,
वही जीत का नारा है,
आत्म-विश्वास की पहचान है,
वही संकट से तारा है।।

गिरकर भी जो उठ जाता है,
हार से सीख बनाता है,
हर बाधा को सीढ़ी करके,
शिखरों तक चढ़ जाता है।
परिश्रम का दीप जलाकर,
जो अंधकार संवारा है,
आत्म-विश्वास की पहचान है,
वही पथ उजियारा है।।

चलते रहने से तन सशक्त,
निभाते रहने से नाते,
दोनों को जो सहेज सके,
वही जीवन के गीत सुनाते।
संबंधों की मधुरता में,
प्रेम का अमृत धारा है,
आत्म-विश्वास की पहचान है,
यही जीवन का सहारा है।।

तो खुद पर विश्वास रखो तुम,
हर क्षण आगे बढ़ते जाओ,
अपने कर्मों की शक्ति से,
नई कहानी गढ़ते जाओ।
जो खुद से ही जीत गया,
जग उसका जयकारा है,
आत्म-विश्वास की पहचान है,
वही विजेता, सितारा है।।

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