आदरणीया मातृशक्ति आशा भोसले जी को सादर श्रद्धांजलि
अरुण दिव्यांशआशा जी चलीं निराशा ढूॅंढ़ने ,
निराशा की चक्षु में झाॅंका था ।
निराशा में पायीं आशा झलक ,
महीन किरण एक ऑंका था ।।
उछाली निराशा को जब नभ में ,
आशा किरण धरा पे आई थी ।
आशा को तब मिली थी आशा ,
पलभर भी व्यर्थ न गॅंवाई थी ।।
भारत को मिला स्वर सम्राज्ञी ,
हमारा भारत बहुत खुश था ।
बच्चा बच्चा बना इनका फैन ,
कोई नहीं इनसे नाखुश था ।।
रो रहा आज भारत यह पूरा ,
माॅं आशा जी की ही याद में ।
बहा रहीं ये अंखियाॅं ऑंसू ,
आज कोटि कोटि तदाद में ।।
कोटि कोटि तुझको नमंन है ,
श्रद्धांजलि अर्पित करता हूॅं ।
भारत को तू शक्ति मति दे ,
शब्द पुष्प समर्पित करता हूॅं ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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