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वर्तमान आरक्षण व्यवस्था-अंबेडकर दर्शन से कितनी दूर?

(डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती _2026)

वर्तमान आरक्षण व्यवस्था-अंबेडकर दर्शन से कितनी दूर?

कुमार महेंद्र
वंदन उस महामनीषी का,
जिसने समता का दीप जलाया।
शोषित-पीड़ित जनमानस को,
निज अधिकारों का भान कराया।
ज्ञान-ज्योति से आलोकित कर,
न्याय-समानता के प्रयास भरपूर।
वर्तमान आरक्षण व्यवस्था, दलित मसीहा दर्शन से कितनी दूर?


डॉ. अंबेडकर का अमर संदेश,
मिटे मानव अंतर भेदभाव।
समरसता पूर्ण हो यह परिवेश,
सर्वत्र हों स्नेह, प्रेम, भाईचारे की छांव।
पर आज समय के दर्पण में,
समाधान की दिशा अभी अधूर।
वर्तमान आरक्षण व्यवस्था, बाबासाहेब दर्शन से कितनी दूर?


क्या वर्तमान आरक्षण पथ,
निभा रहा है वही लक्ष्य?
आरक्षण था साधन केवल,
समता का विस्तार नेपथ्य।
शिक्षा, अवसर, सम्मान हेतु,
पिछड़ों को सशक्त करने का नूर।
वर्तमान आरक्षण व्यवस्था, भीमराव दर्शन से कितनी दूर?


पर क्या यह अब भी वैसा है,
जैसा था उद्देश्य प्रारंभ?
या समय के साथ बदल गया,
उस विचार का स्वरूप और धर्म?
कहीं योग्यता और अवसर के बीच,
उठते हैं कुछ नए प्रश्न भरपूर।
वर्तमान आरक्षण व्यवस्था, सकपाल दर्शन से कितनी दूर?


कहीं नीतिगत स्तर पर इसके,
प्रभाव और परिणाम अनेक।
वर्गों के बीच संवाद बढ़े,
यही हो संतुलन का विवेक।
क्या यह पथ अब भी ले जाता,
समता की उस पावन राह की ओर।
वर्तमान आरक्षण व्यवस्था, राष्ट्र शिल्पी दर्शन से कितनी दूर?


आओ करें पुनः चिंतन-मनन,
उस महान विचारधारा पर।
जहाँ न कोई ऊँच-नीच हो,
न भेदभाव का कोई असर।
आओ मिलकर समझें इसे,
ताकि न कोई रहे मजबूर।
वर्तमान आरक्षण व्यवस्था, अंबेडकर दर्शन से कितनी दूर?


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)


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