एम्स,नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी, पटना के डॉ अभय कुमार जायसवाल सम्मानित

देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान एम्स (AIIMS), नई दिल्ली में नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांस हेल्थकेयर एंड रिहैबिलिटेशन साइंसेज (NCAHRS-2026) का आयोजन 11 एवं 12 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस सम्मेलन का आयोजन डिपार्टमेंट ऑफ जेरियाट्रिक मेडिसिन एवं नेशनल सेंटर फॉर एजिंग, एम्स द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
इस वर्ष सम्मेलन की थीम थी - "Redefining Multidisciplinary Care: Evidence-Based Approaches for Advanced Health Care",जिसका उद्देश्य बहु-विषयक स्वास्थ्य सेवाओं को साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण से नई दिशा प्रदान करना था।.jpeg)
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सम्मेलन का मुख्य आयोजन जे.एल. ऑडिटोरियम, एम्स, नई दिल्ली में हुआ, जबकि 9 एवं 10 अप्रैल को प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप्स आयोजित की गई।
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के स्वास्थ्य एवं पुनर्वास क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसमें फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, डाइटीशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, मनोवैज्ञानिक,स्पीच थेरेपिस्ट, विशेष शिक्षक एवं प्रोस्थेटिक्स ऑर्थोटिक्स विशेषज्ञ शामिल रहे।
सम्मेलन के दौरान रिसर्च पेपर एवं पोस्टर प्रस्तुतिकरण हुए, नवाचार (Innovation) पर चर्चा की गई, इंटरएक्टिव वर्कशॉप्स आयोजित की गई. अवार्ड्स एवं सम्मान समारोह संपन्न हुए। इंटर-कॉलेज क्विज प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
बाल चिकित्सा में Dr. Ganesh B. Tajane द्वारा प्रस्तुत "पेडियाट्रिक ऑक्यूपेशनल थेरेपी में विज़ुअल परसेप्शन" विषय ने विशेष ध्यान आकर्षित किया।उन्होंने बताया कि बच्चों के सीखने, लिखने और दैनिक गतिविधियों में विजुअल परसेप्शन की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। विजुअल डिस्क्रिमिनेशन, स्पेशियल रिलेशन और फिगर-ग्राउंड परसेप्शन जैसे कौशलों पर उन्होंने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शुरुआती पहचान और इंटरवेंशन को बच्चों के बेहतर विकास के लिए आवश्यक बताया। यह प्रस्तुति बाल पुनर्वास में विजुअल परसेप्शन के महत्त्व को उजागर करती है।

प्रख्यात विशेषज्ञ Prof. (Dr.) Anand Mishra द्वारा प्रस्तुत "भारत में प्राचीन से आधुनिक फिजियोथेरेपी का विकास" विषय ने सम्मेलन में विशेष आकर्षण प्राप्त किया।उन्होंने बताया कि आयुर्वेद, योग और पारंपरिक उपचार पद्धतियाँ फिजियोथेरेपी की मूल आधारशिला रही हैं।आधुनिक दौर में तकनीक, अनुसंधान और पुनर्वास विज्ञान ने इसे और उन्नत बनाया है। उन्होंने ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं में फिजियोथेरेपी की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया।यह प्रस्तुति भारत में फिजियोथेरेपी के समग्र विकास को दर्शाती है।
वर्कशॉप सत्र में Dr. Gaurav Chawla द्वारा "मायोफेशियल मेरिडियन्स बैलेंसिंग और असेसमेंट" विषय पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।उन्होंने शरीर के मायोफेशियल नेटवर्क और मूवमेंट पैटर्न के बीच संबंध को समझाया। मैनुअल थेरेपिस्ट के लिए विभिन्न असेसमेंट तकनीकों और ट्रीटमेंट अप्रोच पर विशेष जोर दिया गया।प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस के माध्यम से तकनीकों का अनुभव कराया गया।यह सत्र क्लिनिकल स्किल्स और मूवमेंट एनालिसिस को बेहतर बनाने में उपयोगी रहा।
बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी, पटना के सह प्राध्यापक डॉ अभय कुमार जायसवाल को अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य, अमूल्य योगदान, कठिन श्रम साधना और पीड़ित मानवता की स्वार्थ रहित निष्काम सेवा के लिए Department of Geriatric medicine, National Centre for Ageing, AIIMS,New Delhi द्वारा आयोजित National conference on Advance Health care & Rehabilitation Sciences में Life Time Achievement Award से सम्मानित किया गया। इनके अतिरिक्त डॉ परमानंद सिंह, डॉ सुजित कुमार, डॉ लीली फरहद परवीन एवं रमण कुमार सिंह को भी विभिन्न चिकित्सा सम्मानों से सम्मानित किया गया।
डॉ जायसवाल की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए BCPO के विभागाध्यक्ष एवं नियंत्रण अधिकारी डॉ प्रियदर्शी आलोक ने कहा कि डॉ जायसवाल को मिलने वाली यह उपलब्धि उनके उत्कृष्ट कार्यों एवं निष्काम सेवा भाव का सम्मान है।यह हम सभी के लिए गौरव की बात है।
इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया। विशेष रूप से डॉ. अभय कुमार जायसवाल, डॉ ललित नारायण, डॉ रिंकु रंजन, डॉ. परमानंद सिंह एवं अन्य विशेषज्ञयर्थी ने Scientific Sessions में Chairperson एवं जज (निर्णायक) के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं डॉ. अविनाश धारगावे एवं डॉ. प्रभात रंजन ने Organising ecretary के रूप में सम्मेलन के सफल आयोजन में अहम् योगदान दिया तथा अपने अनुभव एवं विचार भी साझा किए। इसके अतिरिक्त, इस सम्मेलन के पैट्रन (Patron) के रूप में डॉ. नवनीत विग एवं डॉ. अविनाश चक्रवर्ती का मार्गदर्शन एवं सहयोग भी महत्त्वपूर्ण रहा, जिसके कारण यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।
यह सम्मेलन स्वास्थ्य एवं पुनर्वास क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों के लिए ज्ञान, शोध एवं अनुभव साझा करने का एक महत्त्वपूर्ण मंच साबित हुआ, जिससे उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के विकास को नई दिशा मिली। सम्मेलन के सफल आयोजन पर आयोजकों एवं प्रतिभागियों ने प्रसन्नता व्यक्त की और भविष्य में इस प्रकार के आयोजनों को और अधिक व्यापक बनाने पर बल दिया।
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