संस्कार आउर व्यवहार
जय प्रकाश कुवंरअइसन पढ़ाई आ डिग्री कवना काम के,
जवना में कवनो व्यवहारे ना बा ।
अइसन रूप आ सुंदरता कवना काम के,
जवना में कवनो संस्कारे ना बा ।।
पढ़ाई तो नीमन व्यवहार सिखावेला,
पढ़ल लोग नीमन रास्ता दिखावेला।
अश्लीलता कबो सुंदरता ना कहावेला,
जेकरा में संस्कार होला,
उहे रूप सुंदरता सबका से पूजावेला।।
जनम आउर रूप सुंदरता भगवान देले,
बाकिर संस्कार घर में सिखल जाला।
खरीदल सर्टिफिकेट डिग्री पाके,
बहुते लोग घमंड में रास्ता से भटक जाला।।
नीमन शिक्षा नग्नता ना सिखावेला,
खराब संगत भी ढेर लोग के बहकावेला।
रूप थोड़ा कम भी होखे तो भी,
घर के संस्कारी शिक्षा सब दिन काम आवेला।।
प्राथमिक विद्यालय आपन घर हवे,
पहिला गुरु माई बाप ही कहावेला।
घर का विद्यालय के संस्कारी शिक्षा,
जड़ मजबूत करके सारा जिनिगी काम आवेला।।
जय प्रकाश कुवंर
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