हनुमान जयंती पर हनुमान साधना की चेतना- जिससे प्राण को जीतकर चिरंजीवी हुए हनुमान जी|
योग विशेषज्ञ हृदय नारायण झा
पटना। हनुमान जयंती आज गुरुवार को चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर मनाए जाने की तैयारी महावीर मंदिर, पटना जंक्शन सहित शहर के सभी हनुमान मंदिरों में की गई है। इस वर्ष हनुमान जयंती पर पूजन, सुन्दरकाण्ड पाठ, हनुमान चालीसा पाठ आदि का आयोजन किया जाएगा। साथ ही हनुमान जी की भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाएगी।
जहाँ हनुमान भक्तों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, वहीं भक्तों को हनुमान जी की कृपा से अधिकाधिक लाभान्वित होने का मार्गदर्शन देने की परंपरा लुप्तप्राय होती जा रही है। न तो हनुमान भक्त वैसे साधक दिखाई देते हैं और न ही मंदिरों का कोई प्रबंधन इस दिशा में जागरूक दिखता है।
यह सभी जानते हैं कि हनुमान जी चिरंजीवी हैं, किन्तु भक्तों के बीच वह मार्गदर्शन नहीं दिखता, जिन मार्गों से कठिन से कठिनतम साधना करके हनुमान जी ने प्राण को जीत लिया और चिरंजीवी हुए।
जिस साधना से हनुमान जी बल, बुद्धि, विद्या के निधान हुए, रावण-रचित बंधनों का नाश किया, आनंद की मूर्ति बने, कवि-शक्ति, बुद्धि-प्रखरता, अंतरदृष्टि, आकाशगमन करने की क्षमता, प्रचंड वेग से आकाशचारी बनने की शक्ति तथा एक शरीर से अनेक रूप धारण करने की सिद्धि प्राप्त की, और अंततः प्राण को अपनी सत्ता में विलीन कर चिरंजीवी बनने की सफलता प्राप्त की l इस संबंध में
सद्गुरु का मार्गदर्शन है -
एकांगुल कृते न्यूने प्राणनिष्कामते मता l
आनन्दस्तु आनन्दस्तुद्वितीयस्तु कविशक्तिस्तृतीयके ll
वाचाशुद्धि चतुर्थे च दूरदृष्टिस्तु पंचमे l
षष्ठेत्वाकाश गमने चण्ड वेगश्च सप्तम: ll
अष्टमे अष्टसिद्धिस्यात नवमे निधियो नव: l
दशमे दशमूर्तिस्यात छायान्यूनैकादशे ll
इस साधना के सदगुरु का मार्गदर्शन कहता है कि प्रथम से पंचम सोपान अर्थात् दूरदृष्टि तक की साधना आज भी सभी मनुष्य के लिए अनुकरणीय और साध्य है।
किन्तु साधना के उस मार्ग में प्रवेश के लिए अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह पाँच यम के साथ साथ शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर-प्रणिधान पाँच नियमों का पालन करते हुए मन और इंद्रियों को वश में करके आसन साधना होता है।
आसन स्थिर होने के पश्चात तीन महीने तक नाड़ी शोधन का अभ्यास करके शरीर को रोग रहित, विकार रहित बनाने के बाद ही प्राणायाम साधना की योग्यता प्राप्त होती है l
इस अभ्यास के बिना किये गये प्राणायाम की साधना का लाभ नहीं मिलता।
वर्तमान में जहॉं परिवार से लेकर समाज और राष्ट्र हित के लिए रोगमुक्त सशक्त मानव निर्माण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति युक्त शक्तिशाली युवापीढ़ी निर्माण की आवश्यकता है, वहाँ आवश्यक है कि हनुमान जी की पूजा, आरती, पाठ, स्तुति आदि के साथ-साथ हमारे मानव जीवन को दिव्य जीवन में परिणत करने करनेवाली हनुमान जी साधना का सम्यक मार्गदर्शन भी प्राप्त करें और स्वस्थ सबल, श्रेष्ठ मानव जीवन की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त हो l
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