बुढ़उ
भोजपुरी हास्य व्यंग्यवाह रे आज के जमाना ।
युवा के छूट बुढ़उ के जुर्माना ।।
युवा माहिर करे में बहाना ।
हर काम में बुढ़उए रवाना ।।
एक त बुढ़ दूसरे में रोगी ।
नवका से बूढ़े बा उपयोगी ।।
रोगीयो होके बूढ़े बा स्वस्थ ।
दिनभर काम में रहेले मस्त ।।
रोगियो होके बूढ़े बा व्यस्त ।
आलस से युवा भईले पस्त ।।
बुढ़उ के काम गौरव लागे ।
नवका काम से दूरहीं भागे ।।
दैहिक काम समझे तौहीनी ।
आलस उनके भईल ऋणी ।।
नवका कहे हम जवान बानी ।
बुढ़उ कहे अवगुण खान बानी ।।
अंत कहे युवा हम जवान बानी ।
रउआ बूढ़ बाकी महान बानी ।।
नवकन के रउआ ज्ञान बानी ।
हम जवान रउआ जान बानी ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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