दुनिया में जितने भी गम हैं

दुनिया में जितने भी गम हैं

उनके पीछे दो ढाई जन हैं।
रूस चीन और नार्थ कोरिया
अमेरिका में भी कुछ खम हैं।

रूस चीन विस्तारवादी
अमेरिका टकराववादी।
वर्चस्व का यहाँ जश्न है,
आतंक का पाक वतन है।

सिया सुन्नी भी टकराते
दोनों खुद को श्रेष्ठ बताते।
इज़राइल के साझा दुश्मन,
फिलिस्तीन का हुआ पतन है।

कभी कभी तो ऐसा लगता
दुनिया को इस्लामिक ख़तरा।
डर भरा सभी के मन है
कहीं नहीं दुनिया में अमन है।

छोटे देश बने हैं बकरी
चीन रूस की चाल है तगड़ी।
मेरी मुर्गी तो पहले से मेरी
तेरी मुर्गी पर अब मन है।

दुनिया भर में तनाव बढ़ा है
बाहर भीतर बारूद भरा है।
आस जगी भारत से सबको
चिंतन जग में यही गहन है।

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
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