Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

अतीत और भविष्य का सेतु हैं किताबें: सत्येन्द्र कुमार पाठक

अतीत और भविष्य का सेतु हैं किताबें: सत्येन्द्र कुमार पाठक

जहानाबाद। विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस के वैश्विक अवसर पर आचार्यकुल। के राष्ट्रीय प्रवक्ता के साहित्यकार एवं इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने समाज और युवा पीढ़ी को पुस्तकों के महत्व के प्रति पर बल दिया कि पुस्तकें केवल कागजों का पुलिंदा नहीं, बल्कि वे सभ्यता की वाहक हैं जो हमें हमारे अतीत से जोड़ती है कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा, "एक पुस्तक बीते हुए कल की स्मृतियों और ज्ञान को सहेजकर रखती है। आज के डिजिटल दौर में जहाँ सूचनाएं क्षणिक हैं, वहीं पुस्तकें ज्ञान का स्थायी स्रोत हैं।" उन्होंने जोर दिया कि लेखकों के बौद्धिक संपदा अधिकारों (कॉपीराइट) का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है ताकि मौलिक लेखन को बढ़ावा मिल सके।इस विशेष दिन के इतिहास और इसकी वैश्विक प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया गया: विश्व पुस्तक दिवस की नींव स्पेन के बार्सिलोना में पड़ी थी। 'सर्वेंट्स पब्लिशिंग हाउस' के निदेशक विंसेंट क्लेवेल एंड्रेस ने सबसे पहले लेखकों को सम्मानित करने के लिए एक विशेष दिन का प्रस्ताव रखा।। प्रारंभिक आयोजन 7 अक्टूबर 1926 को महान लेखक मिगुएल डे सर्वेंट्स की जयंती के रूप में मनाया गया था।
23 अप्रैल का चुनाव: बाद में 1930 में, सर्वेंट्स की पुण्यतिथि को अधिक सम्मान देने के उद्देश्य से इस तिथि को बदलकर 23 अप्रैल कर दिया गया।वर्ष 1995 में पेरिस में आयोजित यूनेस्को की सामान्य सभा में इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली। तब से हर साल 23 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस' के रूप में मनाया जाता है, ताकि पठन-पाठन, प्रकाशन और कॉपीराइट के महत्व को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया।इतिहासकार पाठक ने बताया कि 23 अप्रैल की तारीख को चुनने के पीछे गहरा साहित्यिक कारण है। यह दिन विश्व साहित्य की कई महान विभूतियों की जन्म या पुण्यतिथि से जुड़ा है:विलियम शेक्सपियर: अंग्रेजी के महान नाटककार और कवि।मिगुएल डे सर्वेंट्स: कालजयी कृति 'डॉन क्विक्सोट' के लेखक।इंका गार्सिलासो डी ला वेगा: प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक। सत्येन्द्र कुमार पाठक ने समाज से अपील की कि वे अपने घरों में एक छोटा पुस्तकालय अवश्य बनाएं और बच्चों में बचपन से ही किताबें पढ़ने के संस्कार डालें। उन्होंने कहा कि कॉपीराइट नियमों का पालन करना न केवल कानूनी अनिवार्यता है, बल्कि यह एक लेखक की मेहनत और उसकी रचनात्मकता के प्रति सच्चा सम्मान है।"किताबें पढ़ने की संस्कृति ही एक जागरूक और सभ्य समाज का निर्माण कर सकत
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ