Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

फगुआ की आहट

फगुआ की आहट

डाक्टर सुधा सिन्हा
माघ का जाना और फगुआ का आना ,
पैदा करे दिल में सपने सुहाना,
धरती दुल्हनिया सी सजने लगी है,
लगता है उसका तो रूप सलोना।

पी पी पपीहे की रस घोलती है ,
कोयल की मधुर तान मस्त करती है,
आम की मंजरी डोल रही है,
फल में बदलने को तडप रही है।

चंदा की चंदनिया फीकी पडी है,
भौरों की गुनगुन लेके तितली उडी है ,
मुझको भी पंखों के संग उड जाना,
बादलों के बीच में जा के सिमटना।

मुझपे तो पियरी ही चढने लगी है,
कुछ भी नहीं मुझे भाने लगी है,
बासंती चोला मुझे याद आती है,
दिल में इक शोला सी उठने लगी है।

जलियांवाला बाग में गोली चली थी,
वहां पे तो खून की होली हुयी थी,
नयन हमारे भींग ही जाते,
कितनी जिन्दगानियां दाव पे लगी थी।

झासी की रानी भी खूब लडी थी,
अंगरेजों की थी छक्का छोडाई ,
बीर कुंवर सिंह भी कूद पडे थे,
उन्होंने दुशमनों की बाट लगायी ।

चीन और पाक को हमको हराना,
सर्जिकल स्ट्राइक करके मिटाना,
इन्होंने तो हमको बहुत सताया ,
उठक बैठक इनसे करनाना।

हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ