होते हैं कुछ कृतघ्न, सबको दोष मत दीजिये,
सेवा करते माँ बाप की, ध्यान उन पर कीजिये।ख़ामियाँ जब कहीं, चर्चा सब ओर करते मिले,
अच्छाइयों की बात का भी, संज्ञान कुछ लीजिये।
कर्तव्य माँ बाप का, बच्चों को पढ़ाना बढ़ाना,
दायित्व बच्चों का, अपने कर्तव्य को निभाना।
सामंजस्य दोनों बनायें, बदलते वक्त की चाह,
एकल परिवारों में मुश्किल, सामंजस्य बनाना।
पहले से ज्यादा आजकल, बच्चे ध्यान रखते हैं,
माता पिता की सुख सुविधा, समाधान रखते हैं।
अपेक्षाएँ हम बड़ों की, कुछ अधिक रहने लगी,
फिर भी हमारी ज़रूरतों का, वह ध्यान रखते हैं।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
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