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नदियाँ ( स्त्री और पुरुष )

नदियाँ ( स्त्री और पुरुष )

जय प्रकाश कुवंर
सनातन संस्कृति में नदियों को जीवनदायिनी, माता और पूजनीय माना जाता है। अतः भारतवर्ष में अधिकांश नदियों को स्त्रीलिंग माना जाता है और उनके नाम महिलाओं या स्त्रियों के नाम पर हैं। जैसे गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, कृष्णा, गोदावरी, गोमती, ताप्ती, सिंधु, कावेरी, सरयू, कोशी, गंडकी, महानदी, महानंदा, हुगली आदि। इन सभी नदियों को स्त्री रूप में माना एवं पूजा जाता है। इनमे उत्तर, मध्य तथा पुर्वोत्तर भारत में बहने वाली नदियाँ हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं से निकलती हैं। इनमें गंगा, यमुना, सरस्वती, गोमती, सिंधु, सरयू, कोशी, गंडकी, महानंदा आदि प्रमुख हैं। हुगली नदी गंगा नदी की ही एक शाखा है। जबकि दक्षिण, पश्चिम तथा भारत के मध्य भाग में बहने वाली नदियाँ दक्षिण पश्चिम भारत के पर्वत श्रृंखलाओं से निकलती हैं। इन नदियों का उद्गम स्थल इस प्रकार है :-
कृष्णा तथा गोदावरी नदी महाराष्ट्र राज्य के महाबालेश्वर एवं नासिक के ब्रह्मगिरि पर्वत श्रृंखलाओं से निकलती हैं।
कावेरी नदी कर्नाटक राज्य के ब्रह्मगिरि पर्वत श्रृंखलाओं से निकलती है।
नर्मदा तथा ताप्ती नदियाँ मध्यप्रदेश राज्य के अमरकंटक पहाड़ी एवं बैतूल के सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं से निकलती हैं।
महानदी छत्तीसगढ़ राज्य के फरसिया जगह पर सिहावा पर्वत श्रृंखलाओं से निकलती है।
इन स्त्री नदियों के अलावा भारतवर्ष में कुछ नदियों को पुरुष की संज्ञा दी जाती है और उन्हें पुरुष नदी माना जाता है। इसमें ब्रह्मपुत्र नदी को प्रमुख पुरुष नदी माना जाता है। ब्रह्मपुत्र के अलावा सोन अथवा सोनभद्र, दामोदर, रूपनारायण तथा अजय नदी को भी पुरुष नदी माना जाता है। ये नदियाँ अपनी उग्र प्रकृति तथा पौराणिक मान्यताओं के कारण पुरुष नदी मानी जाती हैं।
ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम तिब्बत का मानसरोवर झील है। यह वहाँ से निकलकर भारत में असम राज्य होकर बहती है। ब्रह्मपुत्र नदी अपनी प्रचंड जलधारा, विनाशकारी बाढ़ और अनिश्चित व्यवहार के कारण एक उग्र नदी के रूप में प्रसिद्ध है। इसलिए इसे प्रमुख पुरुष नदी माना जाता है।
सोन अथवा सोनभद्र नदी का उद्गम स्थल मध्यप्रदेश राज्य के अमरकंटक पहाड़ी श्रृंखलाओं से है। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा जी की तपस्या से उनकी दाहिनी आंख के अश्रु से सोन और बायीं आंख के अश्रु से भद्र की उत्पत्ति हुई। ये दोनों ब्रह्मा जी के मानस पुत्र माने जाते हैं। इनका संयुक्त रूप सोनभद्र अथवा सोन नदी के नाम से जाना जाता है। सोन नदी को भी पुरुष नदी माना जाता है।
दामोदर नदी झारखंड राज्य के छोटानागपुर पठार से निकलती है। इस नदी का रौद्र रूप बहुत बड़े क्षेत्र में बाढ़ और विनाश का कारण बनता है। अतः दामोदर नदी को सदा नर रूप में देखा जाता है।
रूपनारायण नदी का उद्गम स्थल भी झारखंड राज्य का छोटानागपुर पठार क्षेत्र ही है। इसे भी पुरुष नदी की संज्ञा दी गई है।
अजय नदी का उद्गम स्थल बिहार प्रदेश के जमुई जिले का छोटी पहाड़ियों की श्रृंखला है। यह नदी उग्र रूप धारण कर विनाश लीला करती हुई हुगली नदी में मिल जाती है। इसे भी पुरुष नदी माना जाता है।
वैसे देखा जाए तो भारतवर्ष में छोटी बड़ी कुल मिलाकर लगभग ४०० नदियाँ बहती हैं, जिनमें लगभग २०० प्रमुख नदियाँ हैं। उपर में वर्णित प्रमुख नदियों के अलावा भारत में क्षेत्र और जगह विशेष के अनुसार अनेक छोटी बड़ी नदियों को पुरुष और स्त्री नदियों की संज्ञा दी गई है । लेकिन उपरोक्त स्त्री और पुरुष नदियों की ही ज्यादा चर्चा होती है और इन्हें प्रमुखता दी जाती है।

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