यादें ताजा हो गई
संजय जैनमेरे तेरे तेरे मेरे
अभी सपने अधूरे है।
जिन्हें पूरा करने को
तेरी बहुत जरूरत है।।
मिली है जिंदगी हमको
कुछ अच्छा करने को।
इसलिए तेरा मुझको
चाहिए साथ अब प्रिये।।
बहुत वर्षो के बाद आज
लौटा हूँ फिरसे पुराने दौर में।
जब हम नये-नये बंधे थे
प्यार के पावन बंधन में।
उसी समुद्र किनारे आज
फिर बैठने को आये है।
और यादों को फिर से
ताजा करने जा रहे है।।
समुद्रीय हवाओं के झोको ने
दिल दिमाग ठंडा कर दिया।
पानी की ऊँची उठती लहरों ने
समुद्र किनारे को चौपटी बना दिया।
और प्यार मोहब्बत करने वालों की
जोड़ीयों में प्यार को जगा दिया।
इसलिए सागर किनारे को लोगों ने
प्यार मोहब्बत का स्थान बना लिया।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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