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नदियों का विवाह

नदियों का विवाह

जय प्रकाश कुवंर
भारतवर्ष में अधिकांश नदियों को स्त्रीलिंग माना जाता है। वो भले ही देवी हैं और हमारी पूज्य हैं, परंतु वो किसी की बेटी और पत्नी भी हैं। एक स्त्री होने के नाते बहुत सारी नदियों ने अपनी शादी कर रखी हैं। कुछ नदियाँ ऐसी भी हैं जिन्होंने किसी कारणवश शादी करने से इनकार कर दिया है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंगा पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं, जिनका विवाह हस्तिनापुर के राजा शान्तनु के साथ हुआ था। भीष्म पितामह को गंगा पुत्र कहा जाता है।
यमुना सूर्य देव की पुत्री हैं, जिनका विवाह भगवान श्री कृष्ण के साथ हुआ था। यमुना का एक नाम कालिंदी भी है। कालिंदी श्री कृष्ण की आठ पत्नियों में से एक थीं। यमुना के दश पुत्र थे।
सरस्वती को पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रह्मा जी की पुत्री और पत्नी माना जाता है। उन्हें ब्रह्मा जी की मानसिक पुत्री कहा जाता है, जिन्होंने सृष्टि के सृजन कार्य में ब्रह्मा जी की मदद की और बाद में ब्रह्मा जी की पत्नी बन गयीं। सरस्वती के पुत्र का नाम स्वयम्भू मनु माना जाता है।
कावेरी नदी भी परम पिता ब्रह्मा जी की मानस पुत्री हैं , जिनका विवाह महर्षि अगस्त्य के साथ हुआ था।
नर्मदा नदी राजा मैखल की पुत्री हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार नर्मदा नदी का विवाह ब्रह्मा जी के मानस पुत्र सोनभद्र नदी के साथ होना तय हुआ था। सोनभद्र नदी भी एक पुरुष नदी हैं। विवाह के पहले नर्मदा ने अपनी सहेली जुहिला को सोनभद्र के पास कुछ संदेश देने के लिए भेजा। लेकिन जुहिला एक गद्दार स्त्री निकली और वह खुद राजकुमार सोनभद्र से प्रेम करने लगी। इस बात का पता जब नर्मदा को चला तब उसने सगाई तोड़ दिया। इस घटना से दुखी होकर नर्मदा ने यह प्रण किया कि वह आजीवन अविवाहित रहेगी और उसने अपनी प्रवाह की दिशा बदल कर उल्टी दिशा पश्चिम की ओर बहने लगी। सोनभद्र दक्षिण से उत्तर-पूर्व की ओर बहती है।
यहाँ यह बताना जरूरी है कि भारतवर्ष की अधिकांश प्रमुख नदियाँ उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व दिशा की ओर बहती हैं और बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। इन में गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियाँ हैं। जबकि नर्मदा जैसी एक मुख्य नदी उल्टा पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हैं और अरब सागर में गिरती है।
इस प्रकार हम देखते हैं कि पौराणिक कथाओं के अनुसार अनेकों मुख्य नदियों ने अपना विवाह कर रखा था, अथवा कुछ कारणवश अविवाहित रहने का प्रण कर रखा था।

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