राजनीति में पुनर्जागरण का संकेत कर रही हैं दीदी ममता बनर्जी।
- पुनर्जागरण की धरती से राजनीतिक पुनर्जागरण का संकेत बंगाल चुनाव में
हृदय नारायण झा,योग विशेषज्ञ, गीतकार
पटना,दिव्यरश्मि
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण में व्यक्त हैं, जिसमें बताया गया है कि देवी शक्ति महाशक्ति महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती रूप में त्रिगुणमयी है l नारी इनक तीनों की अनन्त शक्तियों का एक अंश है। ज्ञान प्रदान करते हुए माँ दुर्गा हिमालय को यह ज्ञान का उपदेश देते हुए कहती हैं । मिथिला और बंगाल में गौरी और सीता बेटी के रूप में पूज्य है।
आज जहाँ देश में आसुरी वृत्तियों से प्राप्त आसुरी शक्तियों के अनाचार, दुराचार, अत्याचार, अन्याय, दुष्टभाव, स्वार्थ भाव, हिसा, हकमारी, व्यभिचार आदि से धर्म की हानि हो रही है l उन आसुरी वृत्रियों के प्रभाव में दम तोड़ रही है लोकतंत्र l जाति, धर्म,वर्ण, वर्ग, भेद भाव से लोकतंत्र छिन्न भिन्न होकर रह गयी है कई राज्यों में।
ऐसे में देवी के तीनों रूप में बंगाल के इस चुनाव में प्रगट होकर बंगाल की आन-बान-शान, माँ माटी मानुष की प्रतिमूर्ति वैदिक संज्ञान सूक्त संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनासि जानताम को आत्मसात कर सबकी दीदी ममता बनर्जी ने -काली रूप में अन्याय की आसुरी वृति का संहार करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत होकर जनता के हित की लड़ाई लड़ी और देश भर के नेताओं को सीख दी कि एक नेतृत्वकर्ता के लिए लोक सेवा और त्याग कितना अहम होना चाहिए।
लक्ष्मी के रूप में अपने बंगाल की मानवीय संस्कृति और मनीषियों के राजनीतिक आदर्शों को आत्मसात कर आचरण में सादगी मितव्यापिता, लोकसेवा और त्याग की राजनीति में यम-सत्य, अहिंसा, अस्प्रेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह और नियम - शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान की जीवन शैली अपनाकर लोक कल्याण कार्य से देश भर के नेताओं के समक्ष उदाहरण रखा है कि एक नेतृत्वकर्ता का चाल चरित्र कैसा होना चाहिए ?
सरस्वती के रूप में उनकी ज्ञानशक्ति का परिचय उनके द्वारा रचित ग्रंथों में निहित होने के साथ साथ सत्ता जीवन में राज्य के अंतर्गत शिक्षा संस्कृति के कार्य सहित भगवान श्री कृष्ण की उक्ति एकोहं वहुस्यामः की भावना को चरितार्थ करते हुए महुआ मोइत्रा, सयोनी घोष, प्रियदर्शिनी घोष जैसे अनेको सशक्त नेतृत्वकर्ता बनाकर देशभर के नेताओं के सामने एक नेतृत्वकर्ता, एक मुख्यमंत्री का राजनीति के हित में कर्तव्यबोध का जो परिचय दिया है उसमे भारत की गौरव रत्नगर्भा आदर्श चरित्र का दर्शन भी है और राज्यों के मुख्यमंत्रियो सहित सभी वरिष्ठ नेताओं के लिए अनुकरणीय प्रेरणा भी है।
आज मानवीय सभ्यता संस्कृति आधारित भारतीय सभ्यता संस्कृति के अनुकूल राजनीति की शुचिता और श्रेष्ठता को राष्ट्र स्तर पर पुनर्जागरित और प्रतिष्ठित करने में ममता बनर्जी ही एक मात्र नेतृत्वकर्ता साबित हो सकती है।
राजनीति के भारतीय संदर्भ में सभी दलो में सर्वश्रेष्ठ नेतृत्वकर्ता का आइकन, सबके लिए विशेषत: नारी शक्ति प्रेरक चरित्र बन चुकी है l सबके आदर सम्मान का पात्र बन चुकी है l नारी की अन्तर्निहित अनन्त शक्तियों को जगाने का काम जो ममता बनर्जी ने कर दिखाया दूसरा सोच भी नहीं सकता।
ममता दीदी ने साबित कर दिया कि आप सब उपाय कर सकते है किसी के जीवन चरित्र के सद्गुणों को नहीं नकार सकते हैं। आज पुनर्जागरण की धरती बंगाल भारतीय राष्ट्रीय राजनीति में पुनर्जागरण का संकेत कर रही हैं दीदी ममता बनर्जी।
चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की अग्रिम बधाई ममता दीदी को समर्पित ।
हृदयनारायण झा योग विशेषज्ञ, गीतकार
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