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आदि शंकराचार्य भगवान का 2533 वां प्राकट्य महोत्सव लखनोर,जिला मधुबनी, बिहार में संपन्न हुआ ।

आदि शंकराचार्य भगवान का 2533 वां प्राकट्य महोत्सव लखनोर,जिला मधुबनी, बिहार में संपन्न हुआ ।

आदि शंकराचार्य भगवान का 2533 वां प्राकट्य महोत्सव श्रद्धा एवं भक्ति के साथ जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज जी के कृपा पात्र शिष्य ब्राह्मण भूषण अधिवक्ता श्री प्रेमचंद्र झा के सानिध्य में मिथिला के महान संत लक्ष्मी नाथ गोसाई जी महाराज द्वारा स्थापित राधा कृष्ण मंदिर प्रांगण लखनोर, झंझारपुर, जिला मधुबनी, बिहार में संपन्न हुआ।


श्री प्रेमचंद्र झा जी ने मानव उत्थान में आदिगुरु शंकराचार्य जी महाराज के योगदान उनके प्राकट्य का प्रयोजन पर प्रकाश डालते हुए कहा भगवान शंकर देवताओं के रक्षा के लिए अवतरित हुए थे , उस समय में सब अपने-अपने कर्म को छोड़ने जा रहे थे विधर्मियों का प्रभाव देश में अधिक हो गया था, देवताओं का शक्ति कर ह्रास हो गया था ।
उस भीषण परिस्थिति में आदि गुरु शंकराचार्य महाराज
ना कहीं गली का प्रयोग किया ना गोली का , सिर्फ शास्त्रार्थ के बल पर 32 वर्ष की अवस्था में चारों धाम का पुनरुद्धार कर उस समय के तत्कालीन राजा सुधर्मा का हृदय परिवर्तन कर सारभोम सम्राट घोषित किया।
यदि आदि शंकराचार्य का प्राकटय ईशा से 507 वर्ष पूर्व नहीं होता तो हम लोग आज सनातनी नहीं रहते ।
उन्होंने दशनामी सन्यासी का स्थापना कर मिथिला के महान विद्वान पंडित मंडण मिश्र एवं उनके पत्नी उभय भारती से शास्त्रार्थ कर चारों धाम के रक्षा के लिए चार शंकर पीठ का स्थापना कर अपने प्रमुख शिष्य को उस पीठ पर आचार्य स्वरूप स्थापित किया ।

आज भी इस परंपरा का निर्वाह पूरी पीठ के वर्तमान 145 वां पुज्य शंकराचार्य जी महाराज वर्ष में 365 दिन मे 250 से अधिक दिन तक भारत और नेपाल की सीमा में यात्रा करते हुए सनातन का अलख जगा रहे हैं।

इस कार्यक्रम में वृंदावन ,झारखंड, समस्तीपुर, दरभंगा ,मधुबनी एवं अन्य जिले के धर्म परायण राष्ट्रभक्त विद्वान उपस्थित हुए ।
कार्यक्रम का अध्यक्षता करते हुए आचार्य काशीनाथ किरण जी ने आदि शंकराचार्य भगवान के बारे में प्रकाश डाला।
वृंदावन से पधारे भागवत कथा मर्मज्ञ श्री जय नाथ महाराज जीने वर्तमान पुरी के 145 वें शंकराचार्य जी महाराज द्वारा सनातन मान बिंदुओं के रक्षा के लिए पुरी पीठ से चलाए जा रहे अभियान एवं उनके सादगी जीवन पर प्रकाश डाला। आईआईटीएन समाजसेवी अनूप कुमार झा जी, प्रोफेसर श्री शंकर झा ,डॉ कृष्ण मुरारी झा, लेखक आनंद कुमार झा, अभिनव कुमार झा, विक्रम झा एवं अन्य भक्त ने भी अपने विचार रखें ।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं श्री बीके बाबा वैदेही द्वारा स्वागत गान के साथ किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं प्रायोजक श्री सुमित सुमन जी अध्यक्ष सिमर फिल्म इंटरनेशनल ने दक्षता पूर्वक किया ।
कार्यक्रम के संयोजक श्री सुनील कुमार झा जी ने भी अपने विचार व्यक्त किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री संजय झा ,विपिन झा हिमकर कुंडिल्य, गोपाल झा, जय शंकर मिश्रा, अमर चौधरी एवं अन्य क्षेत्रवासी सक्रिय रहे। हर हर महादेव।
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