मित्रता के रंग
अरुण दिव्यांशमित्रता के रंग ,
जीवन के संग ,
जिंदगी का उमंग ,
रिश्ता बनता गंग ।
मित्रता के रंग ,
जीने का है ढंग ,
मित्रहीनता अपंग ,
अकेलापन है तंग ।
जीवन के जंग ,
दुनिया है दंग ,
मित्रता के बिन ,
खुशियाॅं हैं भंग ।
मित्रता के रंग ,
जैसे गंग तरंग ,
मित्रता के बिना ,
जीवन है बदरंग ।
मित्रता के रंग ,
आयु का अंग ,
रोगी जैसे चंग ,
निष्ठा जब संग ।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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