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होली के रंग

होली के रंग

अंजनी कुमार पाठक
मैं जवान हूं सदाबहार हूं
हौसले भी बढ़ गये
कहने वाले कहते रहे
तुम तो बूढ़े हो गये
चटकदार पोशाक में
जब भी जाता बाजार में
देखकर मेरी जवानी
चर्चा भी होती यार में
सफेद बाल रंग दिये
सारे काले हो गये
कहने वाले कहते रहे
तुम तो बूढ़े हो गये
होली में साली बुलायी
पहुंच गये ससुराल में
ज्यादा खा ली थी भंग गोली
सहम गये देख इस हाल में
पूआ बड़ा खाते पीते
होली के रंग में ढल गये
कहने वाले कहते रहे
तुम तो बूढ़े हो गये।
------अंजनी कुमार पाठक, ब्राह्मण टोली, मुजफ्फरपुर --८४२००१, बिहार
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