प्रगट हुए महावीर
बता दो कहाँ मिलेंगे वीर,बता दो कहाँ मिलेंगे
महावीर –२।
चारोंधाम के तीर्थ करके ,
पहुँच गए कुण्डल क्षेत्र ,
बता दो कहाँ मिलेंगे वीर,
बता दो कहाँ मिलेंगे महावीर।
वो त्रिशाला के नंदन है,
सिध्दार्थ के घर जन्मे।
बाल ब्रह्मचारी रहकर ,
किया तपस्या उन ने।
जिओ और जीने दो का,
दिया उन्होंने सन्देश।
बता दो कहाँ मिलेंगे वीर,
बता दो कहाँ मिलेंगे महावीर –२।।
कई अतिशय दिखलाये,
एक ग्वाले की गाय ।
दूध टीले पर रिसया,
अतिशय वहां दिखाया।
सपने में ग्वाले को दिखकर,
सपने में ग्वाले को दिखकर।
प्रगट हुए महावीर,
बता दो कहाँ मिलेंगे वीर।
बता दो कहाँ मिलेंगे वीर,
बता दो कहाँ मिलेंगे महावीर।।
उपरोक्त भजन आज महावीर स्वामी जी के जन्मकल्याणक महोत्सव के अवसर आप सभी जैन बंधुओ को संजय जैन मुंबई की तरफ से समर्पित है।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुम्बई
30/03/2026

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