स्वागत नई सदी का
मार्कण्डेय शारदेयढहते हुए भवन में स्वागत नई सदी का।
अहम्मन्यता के रण में स्वागत नई सदी का।
टोली बना बुभुक्षा करताल है बजाती,
चिथड़ा पहन गरीबी आशा- रतन लुटाती,
बम फट रहे कहीं औ’ संगीन सनसनाती,
विधवा-विलाप-जैसा है गीत धरा गाती,
ऐसे विषाक्त क्षण में स्वागत नई सदी का।
प्रादूणिक चँवर ले स्वार्थान्धता खड़ी है,
दादागिरी उसी की इस हेतु भी अड़ी है,
विज्ञान को घुमाती उसकी निजी छड़ी है,
लाचार हो चरण में दुनिया स्वतः पड़ी है,
चीत्कार की शरण में स्वागत नई सदी का।
कुछ स्वागती बड़ा ही उत्साह हैं दिखाते,
मानव-रुधिर मँगाकर घर-द्वार हैं धुलाते,
शोषण, दलन, हड़प से आतिथ्य-द्रव्य लाते,
लोभी पुरोहितों से हैं ‘स्वस्ति नः’ कराते,
उनके सड़े सपन में स्वागत नई सदी का।
जीवन नया दिलाने या और कहर ढाने,
स्वार्थान्धता मिटाने या औ उसे बढ़ाने,
सद्भाव को जगाने या मनुजता मिटाने,
क्या प्रकृति को रिझाने या औ उसे खिझाने,
सुर या कि असुर-तन में स्वागत नई सदी का।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ , https://www.facebook.com/divyarashmimag
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ , https://www.facebook.com/divyarashmimag

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews