प्रेम कोई शब्द नहीं , साॅंसों का तराना है
अरुण दिव्यांशप्रेम कोई शब्द नहीं ,
साॅंसों का तराना है ।
जीवन औ रिश्ते का ,
अनमोल खजाना है ।।
मानव के मानवता में ,
प्यार को निभाना है ।
जीवन के व्यवहार में ,
मानना औ मनाना है ।।
प्रेम प्यार के भाव में ,
हॅंसना औ हॅंसाना है ।
क्रंदन का भाव त्याग ,
सदैव ही मुस्कुराना है ।।
मानव के इस जीवन में ,
न भाव का अभाव हो ।
जीत लो दूसरे का दिल ,
न छल कपट दाॅंव हो ।।
दुख में भी स्व चेहरे पर ,
सुंदर मुस्कान सजाना है ।
प्रेम कोई शब्द नहीं यह ,
यह साॅंसों का तराना है ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा सारण बिहार ।
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