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अहिंसा अपरिग्रह से, खुशियों भरा संसार

(श्री महावीर जन्म कल्याणक 2026)

अहिंसा अपरिग्रह से, खुशियों भरा संसार

सर्वत्र समता समानता,
नैतिकता युक्त परिवेश।
चलें सत्य, न्याय के पथ,
शांत हो हर उग्र आवेश।
शिक्षा दीक्षा सुसंस्कार संग,
जीवन पाए उत्तम आकार।
अहिंसा अपरिग्रह से, खुशियों भरा संसार।।


आध्यात्मिक लोकतंत्र पटल,
अनवरत आनंद का स्पंदन।
मिटाकर परस्पर विभेद,
सर्वत्र सुख-शांति का वंदन।
शुद्ध सात्विक विचारों संग,
सदैव अवतरित हो सदाचार।
अहिंसा अपरिग्रह से, खुशियों भरा संसार।।


पर शोषण व अति संचय,
हिंसा का ही दूसरा रूप।
जीवन जागरण नित अहम,
सीमितता नित आदर्श तुरुप।
उपभोग-उपयोग दोनों बिंदु,
संयमितता मूल आधार।
अहिंसा अपरिग्रह से, खुशियों भरा संसार।।


त्याग, प्रेम, करुणा अंतर,
अमृत सागर अथाह विशाल।
प्रकृति उत्संग आनंद निर्झर,
ओजस्वी यशस्वी मनुज भाल।
परोपकार हित सरस प्रयास,
सदा धर्म-कर्म जय-जयकार।
अहिंसा अपरिग्रह से, खुशियों भरा संसार।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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