रंग भर दूं
--:भारतका एक ब्राह्मण.संजय कुमार मिश्र "अणु"
चाहता हूँ
मैं तेरे जीवन में
वो तमाम रंग भर दूं
जिसकी तुम्हें कामना है
रंगों के बिना जीवन
लगता है सुना-सुना
नहीं कटता है समय
रात लगती दोहरी दिन चौगुना
जब सच का सामना है
अक्सर बैठकर मैं
तुम्हें सजाते रहता हूँ
मन की पीडा को दबाकर
हृदय से गुनगुनाते रहता हूँ
मानकर पवित्र भावना है
लाख विपरीत परिस्थिति आई
पर कहीं आंखें न डबडबाई
भले मुफलिसी में रह लिया
पर जूठी हड्डी न चबाई
मिलती रही सांत्वना है
बडी गहराई के साथ
जुड़ा हुआ है मेरा मन
क्या तुम सुनना चाहोगी राग
रखकर मन में अनुराग
चाहता हूँ मैं तमाम रंग भर दूं
इस फाग मान खुद का सौभाग्य
कि तुम्हें अपनाना है
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वलिदाद,अरवल(बिहार) 804402.
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