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महिला दिवस—स्मरण का नहीं, मानवीय प्रेरणा का सशक्त स्रोत:-डॉ. विवेकानंद

महिला दिवस-स्मरण का नहीं, मानवीय प्रेरणा का सशक्त स्रोत:-डॉ. विवेकानंद

गया में डॉ. विवेकानंद पथ स्थित एक सभागार में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक गरिमामय समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला दिवस को केवल स्मरण करने के बजाय मानवीय प्रेरणा, समानता और सामाजिक चेतना के सशक्त स्रोत के रूप में स्थापित करना था।

समारोह की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा और कौटिल्य मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आचार्य सच्चिदानंद मिश्र ने दीप प्रज्वलित करके की। उन्होंने कहा कि महिला दिवस नारी शक्ति के सम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का वैश्विक प्रतीक है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि समाज की प्रगति में महिलाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

इसके बाद कौटिल्य मंच और भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के वरिष्ठ नेता दयानंद मिश्रा ने कहा कि विश्व महिला दिवस महिलाओं के समान अधिकारों और अवसरों के लिए एक वैश्विक आंदोलन का प्रतीक है। यह दिन महिलाओं को अपने स्वनिर्मित अस्तित्व के निर्माण के लिए प्रेरित करता है और उनकी सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक उपलब्धियों का उत्सव मनाने का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि आज महिलाएं विज्ञान, शिक्षा, कला, संस्कृति, साहित्य, संगीत, प्रशासन और सामाजिक नेतृत्व जैसे हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं और नई ऊंचाइयों को छूते हुए समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।

वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही नारी को सर्वोच्च सम्मान प्राप्त है। वैदिक परंपरा में नारी को शक्ति, ज्ञान और सृजन का प्रतीक माना गया है। समाज के प्रत्येक कार्य में स्त्री और पुरुष की समान भागीदारी का विचार भारतीय संस्कृति की मूल भावना है।

समारोह में वक्ताओं ने महिलाओं से आह्वान किया कि वे धैर्य, निष्ठा, संकल्प और जीवन की जटिलताओं को स्वीकार करने की अद्भुत क्षमता को अपनी शक्ति बनाएं। इन्हीं गुणों के आधार पर महिलाएं आत्मनिर्भर, स्वतंत्र और स्वाभिमानी जीवन की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं और हर चुनौती का साहसपूर्वक सामना कर सकती हैं।

वक्ताओं ने कहा कि महिला दिवस का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होगा जब यह दिवस महिलाओं के मानवीय साहस, संवेदनशीलता और सामाजिक भागीदारी की सशक्त अभिव्यक्ति का माध्यम बने। समाज में समानता, सम्मान और अवसर की भावना को मजबूत करना ही इस दिवस की वास्तविक उपलब्धि है।

इस अवसर पर कई गणमान्य लोग उपस्थित थे, जिनमें भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा और कौटिल्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्र, प्रसिद्ध समाजसेवी शिवनंदन पांडे, ज्योतिष शिक्षा शोध संस्थान के निदेशक डॉ. ज्ञानेश भारद्वाज, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद याहिया सहित अनेक लोग शामिल थे।

समारोह का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि महिला दिवस को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखकर समाज में समानता, सम्मान और सशक्तिकरण की निरंतर प्रेरणा के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।

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