चैत्र नवरात्रि एवं गुड़ी पड़वा शंका समाधान एवं घट स्थापना मुहूर्त.jpeg)
.jpeg)
〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
नव-संवत् का प्रारम्भ 19 मार्च 2026
आनन्द हठीला
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सूर्योदय के समय ही ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी। इसी दिन विक्रम् संवत् का प्रारंभ हुआ था। यथा चैत्रे मासि जगद्ब्रह्मा संसर्ज प्रथमेऽहनि। शुक्लपक्षे समग्रं तत् तदा सूर्योदये सति ।। सूर्योदय व्यापिनी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन संवत्सर का प्रारंभ होता है।
यथा :- चैत्रशुक्ल प्रतिपदि वत्सरारम्भः तत्रौदयिकी तिथिः ग्राह्याः ।।
विक्रम् संवत् 2023 में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का क्षय हुआ है। 19 मार्च 2026, गुरुवार को सूर्योदय के पश्चात् प्रातः 06:54 से प्रारंभ होगी। प्रतिपदा तिथि 20 मार्च 2026 को प्रातः 04:52 तक रहेगी। दोनों दिन (19 व 20 मार्च को) उदय-व्यापिनी प्रतिपदा नहीं है। यदि दोनों दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा उदय व्यापिनी न हो तो पहले दिन ही संवत्सर का प्रारंभ होगा।
यथा दिनद्वये उदयव्याप्तौ अव्याप्तौ वा पूर्वा ।। - धर्मसिन्धु
अतः इस वर्ष नव-संवत् का प्रारम्भ 19 मार्च 2026 को ही होग, इसी के वार (गुरुवार) के अनुसार 'गुरु' को राजा का पद प्रदान किया जायेगा।
बसंत नवरात्र प्रारंभ 19 मार्च 2026
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
देवीपुराण के अनुसार अमावस्या युक्त प्रतिपदा को दुर्गापूजन शुभ नहीं माना गया है, परन्तु प्रतिपदा तिथि का क्षय हो जाए या वह दूसरे दिन एक मुहूर्त से कम होने पर यह अमावस्या युक्त प्रतिपदा के दिन ही देवीपूजन किया जाता है।
यथा अमायुक्ता न कर्त्तव्या प्रतिपद् चण्डिकार्चने। मुहूर्त्तमात्रा कर्त्तव्या द्वितीयायां गुणान्विता ।।
इस शास्त्रवचन के अनुसार इस वर्ष चैत्र नवरात्र का प्रारंभ 19 मार्च 2026 को ही होगा।
घट स्थापना मुहूर्त
〰️〰️〰️〰️〰️〰️
नवरात्रि में घट स्थापना का बहुत महत्त्व होता है। कलश को सुख समृद्धि , ऐश्वर्य देने वाला तथा मंगलकारी माना जाता है। कलश के मुख में भगवान विष्णु , गले में रूद्र , मूल में ब्रह्मा तथा मध्य में देवी शक्ति का निवास माना जाता है। नवरात्री के समय ब्रह्माण्ड में उपस्थित शक्तियों का घट में आह्वान करके उसे कार्यरत किया जाता है। इससे घर की सभी विपदा दायक तरंगें नष्ट हो जाती है तथा घर में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।
नवरात्री की पहली तिथि पर सभी भक्त अपने घर के मंदिर में कलश स्थापना करते हैं। इस कलश स्थापना की भी अपनी एक विधि, एक मुहूर्त होता है। परंतु चैत्र शुक्ल प्रतिपदा स्वयं सिद्ध साढ़े तीन मुहूर्त में से प्रथम है इसलिये इस दिन किसी भी प्रकार के मुहूर्त देखने की आवश्यकता नही होती फिर भी संभव हो तो इस वर्ष घट स्थापना नीचे दिए मुहूर्त मे करना लाभदायक रहेगा।
इस वर्ष चैत्रशुक्ल प्रतिपदा, 19 मार्च (गुरूवार) को प्रातः 06:54 से अंतरात्रि 04:52 तक है। शास्त्रनुसार बसन्त नवरात्र का प्रारम्भ व घटस्थापना इसी दिन होगी। घटस्थापना हेतु द्विस्वभाव मीन लग्न प्रातः 06:54 से प्रातः 07:50 तक एवं मिथुन लग्न प्रातः 11:24 से दोपहर 01:38 तक है। शुभ चौघड़िया प्रातः 06:54 से प्रातः 08:05, चर लाभ-अमृत का चौघड़िया प्रातः 11:04 से दोपहर 03:32 तक एवं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 से 12:59 तक रहेगा।
इसके पश्चात केवल राहुकाल के समय दोपहर 01:55 से सायं 03:06 तक के समय को छोड़कर अपनी सुविधानुसार दिन में कभी भी घटस्थापना की जा सकती है।〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ , https://www.facebook.com/divyarashmimag

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews