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84 वर्षों बाद हुआ दुखहरण नाथ शिव मंदिर का जीर्णोद्वार

84 वर्षों बाद हुआ दुखहरण नाथ शिव मंदिर का जीर्णोद्वार

संवाददाता  सुरेन्द्र कुमार रंजन की खबर |
शिव भक्तों के अथक प्रयास से पटना जिले के अथमलगोला प्रखंड स्थित अथमलगोला इंग्लिश गांव में में स्थित 'दुखहरण नाथ शिव मंदिर ' का 84 वर्षों के बाद जीर्णोद्धार किया जा रहा है। कहा जाता है कि संवत् 1999 (वर्ष 1942) शाके 1853 के चैत्र कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन अथमलगोला इंग्लिश के ग्रामीण दुखहरण सिंह के सुपुत्र जयराम दास में इस मंदिर की आधारशिला रखी थी।
मंदिर की स्थापना की कहानी भी अपने आप में अनूठी है। बुजुर्ग ग्रामीण राजाराम सिंह ने बताया कि इस मंदिर के निर्माण की एक अजीब कहानी है। ग्रामीण भभीक्षण महतो ने एक दिन दुखहरण सिंह की जमीन पर एक पिंडी बनाकर जलाभिषेक कर दिया। इसके बाद ग्रामीणों द्वारा वहीं जलाभिषेक किया जाने लगा।
दुखहरण सिंह के पुत्र थे जयराम सिंह जो निःसंतान थे। वे एक महात्मा के संपर्क में आए और वैरागी हो गए। वे अन्यत्र किसी ठाकुरबाड़ी मेंवैराग्य जीवन यापन करके लगे। कहा जाता है कि एक दिन उन्हें स्वप्न आया कि यदि तुम एक शिव मंदिर बनवाओगे तो तुम्हारा कल्याण होगा।उस दिन से उनका मन अशांत रहने लगा अंततः उन्होंने निश्चय किया कि एक शिव मंदिर का निर्माण कराया जाय। मंदिर निर्माण के लिए धन की आवश्यकता पड़ी तो उन्होंने अपनी डेढ़ बीघा जमीन बेच दी और जहाँ पिंडी बनाकर ग्रामीणों द्वारा जलाभिषेक किया जा रहा था वहीं मंदिर बनाने की आधारशिला रखी। मंदिर का निर्माण कराया जिसका नाम दुखहरण नाथ मंदिर रखा गया। मंदिर के रख-रखाव के लिए साढ़े तीन बीघा जमीन भी मंदिर के नाम कर दी। मंदिर के रख-रखाव एवं देखभाल के लिए एक ट्रस्ट बना दिया जो मंदिर की जमीन से उपार्जित धन से मंदिर का रख-रखाव करने लगे जो आजतक चल रहा है।
संयोग से जिस गकुरबाड़ी में रहते थे वहीं उनकी नृशंस हत्या कर दी गई। इसके बाद मंदिर की देखभाल ग्रामीणों के द्वारा की जाने लगी। 84 वर्षों में मंदिर की स्थिति जीर्ण-शीर्ण हो गयी तब कुछ शिव भक्त ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि मंदिर का जीर्णोद्वार किया जाय। शिवलिंग को छोड़ मंदिर के चारों तरफ के ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त कर नये तरीके से निर्माण कराने का निर्णय ट्रस्टियों द्वारा लिया गया। मंदिर की ऊंचाई 31 फीट से बढ़ाकर 51 फीट करने का निर्णय लिया गया। मंदिर के शिखर पर पीतल 6 फीट लंबा नौ कलश वाला त्रिशूल लगाया गया है। मंदिर के अंदर श्वेत मकराना मार्बल का नंदी, गणेश और कार्तिकेय की भी मूर्तियां स्थापित की गई हैं।मंदिर के जीर्णोद्धार में अभी तक करीब 12 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं जबकि 4 से 5 लाख रुपए और खर्च होने का अनुमान है। मंदिर को अत्याधुनिक स्वरुप देने मंदिर परिसर में जन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध हैं।
इस मंदिर में मंदिर भवन के लिए जमीन जयराम सिंह उर्फ जयराम दास ने जबकि यज्ञशाला के लिए जमीन स्व० ज्योति देवी पत्नी स्व० अखिलानंद सिंह " वैद्य " ने दान किया था। मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए दान स्वरूप राशि एकत्रित करने में विशुद्धानंद शर्मा, वेद प्रकाश शर्मा एवं गुंजन कुमार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अथमलगोला इंग्लिश के ग्रामीण रंतिदेव शर्मा ने मंदिर के अंदर लगने वाले टाइल्स का पूरा खर्चा उठाया है। तिलोत्तमा देवी ,प्रवीण कुमारी, सुशांत कुमार, ऋषिराज, दीपक कुमार, अथमलगोला प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि राजकिशोर सहित अन्य लोगों ने आर्थिक मदद कर मंदिर के जीर्णोद्वार में अपनी अहम भूमिका निभाई है।
प्रत्येक वर्ष इनकी स्थापना दिवस चैत्र कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को 24 घंटे का अष्टयाम, भजन कीर्तन, राम कथा एवं भंडारा किया जाता है। इस वर्ष भी स्थापना दिवस के पावन अवसर पर 16 मार्च को 24 घंटे का अष्टयाम का आयोजन किया गया और 17 मार्च को समापन के बाद भंडारा किया गया जिसमें 101 ब्राह्मणों सहित करीब 250 लोगों को भोजन कराया गया।18 मार्च से नौ दिवसीय राम कथा का आयोजन किया जा रहा है।
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