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बिहार दिवस 2026 : पटना के गाँधी मैदान में बॉलीवुड सिंगर सोना मोहापात्रा , शान व पापोन के गीतों पर झूम उठे बिहारवासी । ' मिरेकल अॉन व्हील्स ' संस्था द्वारा दिव्यांग कलाकारों की अद्भुत , उत्कृष्ट नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को सम्मोहित किया ।

बिहार दिवस 2026  :  पटना के गाँधी मैदान में बॉलीवुड सिंगर सोना मोहापात्रा , शान व पापोन के गीतों पर झूम उठे बिहारवासी । ' मिरेकल अॉन व्हील्स ' संस्था द्वारा दिव्यांग कलाकारों की अद्भुत , उत्कृष्ट नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को सम्मोहित किया । 
               - मोहिनी प्रिया

बिहार दिवस 2026 का मुख्य तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम 22 से 24 मार्च तक पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान में आयोजित किया गया । बिहार के 114वें स्थापना दिवस समारोह का थीम " उन्नत बिहार , उज्ज्वल बिहार " रखा गया था । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बिहार दिवस समारोह का दीप प्रज्वलित कर उद्धाटन किया गया । उद्घाटन समारोह के बाद कलाकारों ने बिहार गौरव गान की शानदार प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया । बिहार बाल भवन किलकारी के बच्चों ने बिहार के राज्य गीत मेरे भारत के कंठहार , तुझको शत - शत वंदन बिहार .... पेश करते हुए नृत्य के जरिए प्रदेश की लोक - संस्कृति से अवगत कराया । कार्यक्रम के पहले दिन का मुख्य आकर्षण का केंद्र मशहूर सिंगर सोना मोहापात्रा रहीं जिनकी शानदार और दमदार प्रस्तुति ने लोगों को उत्साह और उमंग से भर दिया । उन्होंने जैसे ही मंच संभाला , उन्हें देखने और सुनने के लिए फैंस की भीड़ उमड़ पड़ी । कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने अपने सिग्नेचर सॉन्ग ' रुपैया ' से की और इसके बाद ' जिया लागे ना ' , ' बेखौफ आजाद है जीना मुझे ' गाकर मंच से महिलाओं को बेखौफ और आजाद रहने का मंत्र दिया । उन्होंने बिहार के लोकगीतों की भी शानदार प्रस्तुति दी । स्व. शारदा सिन्हा के गीत ' कोयल बिन बगिया न शोभे ' व मालिनी अवस्थी की चर्चित गीत ' रेलिया बैरन पिया ' पेश की । छठ पर्व को समर्पित गीत ' उगहे सूरज देव , भईल भिनसारवा ' तथा नवरात्र के समय को लेकर माँ दुर्गा के शक्ति स्वरूप के भी गीत गाए । इसके अलावा अम्बरसरिया .... , मेरे रश्के कमर ... , दिल डूबा दिल डूबा .... , कजरा मोहब्बत वाला ... , झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में ... फिल्मी गीतों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया । अपने कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बिहार म्यूजियम की भव्यता की जमकर सराहना की । उन्होंने कहा कि उन्हें कहने में कोई संकोच नहीं की यह देश का सबसे शानदार म्यूजियम है । गुप्तकाल के सिक्कों में एक महिला और एक पुरुष की तस्वीर है जो बताता है कि प्राचीन बिहार में भी महिलाओं की समाज में बराबर की भागीदारी रही है । सोना मोहापात्रा के साथ स्नेहा , तेजस्वी , आरूषि , मृदुला सहभागी कलाकारों की नृत्य प्रस्तुतियां भी काफी सराहनीय थी ।
            बिहार दिवस के दूसरे दिन प्रसिद्ध गायक शान ने अपनी गायकी से धमाल मचाया । शान ने जैसे ही अपने आवाज का जादू बिखेरा पूरा गाँधी मैदान संगीतमय माहौल में डूबा नजर आया । जय बिहार के उद्घोष के साथ कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए शान ने बिहार की अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत की महिमा का गुणगान किया । हम बिहारी है जी , थोड़े संस्कारी है जी .... , भोजपुरी गाना उड़ उड़ बैठी हलवइया दुकनिया .... पेश कर श्रोताओं में उत्साह बढ़ाने के साथ तालियां बटोरी । इसके बाद एक से बढ़कर एक सदाबहार गीतों की उन्होंने झड़ी लगा दी । देखो - देखो ये शाम बड़ी दिवानी ... , जब से तेरे नैना , मेरे नैनों से .... , चाँद सिफारिश ... , हम है नये अंदाज क्यों हो पुराना ... , रॉक एंड रोल ... , हमें तुमसे मोहब्बत हुई है ... , दस बहाने करके ले गए दिल .... गानों से सबको थिरकने पर मजबूर कर दिया । दर्शकों ने तालियों और हूटिंग के साथ उनके गानों का जोरदार स्वागत किया । बिहार के लोगों के बारे में उन्होंने कहा , मुझे तो पहले से ही पता है एक बिहारी सब पर भारी । देर रात्रि तक लोग शान के गानों पर नाचते - झूमते नजर आए ।
             बिहार दिवस के आखिरी दिन गायक पापोन ने अपनी प्रस्तुति देकर समापन समारोह को यादगार बनाया । पापोन ने अपने सोलफुल और रोमांटिक अंदाज से लोगों का दिल जीत लिया । ये मोह मोह के धागे .... , ना आए हो ना आओगे .. , कौन मेरा क्या तू लागे ... , ओ हमनवा मुझे इतना बता .. , एक अजनबी हसीना से यूं मुलाकात हो गई .. , लग जा गले ... , सारा जमाना हसीनों का दिवाना ... , रात बाकी बात बाकी .... जैसे गीतों पर पूरा गाँधी मैदान खो गया । उन्होंने हर तरीके के गानें गाकर इंडी - पॉप , रॉक , फोक - फ्यूजन , रोमांटिक , दर्शकों के बीच एक खास जुड़ाव बनाए रखा । पापोन ने अपने भावना को व्यक्त करते हुए कहा कि हमने सोचा नहीं था कि मैं पटना आऊँगा तो मुझे जनता से इतना प्यार और अपनापन का माहौल मिलेगा । धन्यवाद पटना , धन्यवाद बिहार । बहुत - बहुत शुक्रिया । गाँधी मैदान में तीनों दिनों तक चल रहे कार्यक्रम का संचालन बहुत उम्दा और सुरीली स्वरों में सोमा चक्रवर्ती और सोनी सिंह ने किया । 
         पटना के गाँधी मैदान में स्थित एस. के. मेमोरियल हॉल में बिहार दिवस के अवसर पर बेंगलुरु से आए डॉ सैयद पाशा के नेतृत्व में ' मिरेकल अॉन व्हील्स ' संस्था के दिव्यांग कलाकारों ने अद्भुत और मनमोहक प्रस्तुति दी । ' मिरेकल ऑन व्हील्स ' विश्व का पहला और एकमात्र संगठन है जो व्हीलचेयर शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत करता है । राष्ट्रीय पुरस्कार , गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स , लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और अंतर्राष्ट्रीय मान्यताओं की उपलब्धियों से सुशोभित इन कलाकारों ने देश के सबसे प्रतिष्ठित रियलिटी शो जैसे सत्यमेव जयते , डांस इंडिया डांस और शानदार इंडिया गॉट टैलेंट में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है । इनके परफॉरमेंस ने केवल भारत देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी ख्याति प्राप्त की है । कनाडा , इटली , फ्रांस , मलेशिया , दक्षिण अफ्रीका , कुवैत , मस्कट और यूएई जैसे देशों में प्रदर्शन कर भारत देश का मान - सम्मान व गौरव बढ़ाया है । कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई , जिसके बाद शिव तांडव की प्रस्तुति दी गई । यह प्रस्तुति शास्त्रीय नृत्य और प्रभावशाली योगिक तांडव मुद्राओं का अनूठा संगम था । इसके पश्चात् भरतनाट्यम और कथक शैली में जुगलबंदी प्रस्तुत की गई , जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया । कलाकारों ने व्हीलचेयर पर सूफी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को आध्यात्मिक और दिव्य अनुभव की अनुभूति कराई । यह प्रयोग अपने आप में विश्व में पहली बार देखने को मिला । राम , सीता , रावण व हनुमान बनकर रामायण के प्रसंगों का भी कलाकारी प्रदर्शन किया । इसके अलावा ‘ कांतारा ’ और ‘ जय हो ’ जैसी विशेष प्रस्तुतियों ने दर्शकों को यह विश्वास दिलाया कि ये विशेष कलाकार असाधारण क्षमता से भरपूर हैं , और यह सब उनके गुरु डॉ सैयद सल्लाउद्दीन पाशा के मार्गदर्शन का परिणाम है । डॉ पाशा व्हीलचेयर नृत्य में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं । वे पिछले 40 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है । डॉ पाशा भरतनाट्यम , कथक तथा कोरियोग्राफी में पेशेवर रूप से प्रशिक्षित हैं । यह संस्था नृत्य के माध्यम से दिव्यांग व्यक्तियों को सशक्त बनाने , समाज में उन्हें सम्मान दिलाने और उनके कौशल को प्रदर्शित करने के लिए काम करती है । बिहार सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से यह अनुपम देन ही है कि इतनी उत्कृष्ट , प्रेरणादायक व अविस्मरणीय प्रस्तुति लाकर बिहार दिवस का मान बढ़ाया । शिक्षा विभाग के निदेशक तथा संयुक्त निदेशक समर बहादुर सिंह ने भी मंच पर इनकी प्रशंसा करते हुए संस्थापक डॉ पाशा सहित सभी कलाकारों को अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया । अतः ' बिहार दिवस ' बिहार के लिए उत्सव जैसा ही था जहाँ इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बिहारवासियों को उत्साह , उमंग , गर्व , प्रेरणा और एकता की भावना से भर दिया । -  मोहिनी प्रिया

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