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साहित्यकार सत्येंद्र कुमार पाठक को नेपाल में मिला ‘मातृभाषा रत्न’ सम्मान

साहित्यकार सत्येंद्र कुमार पाठक को नेपाल में मिला ‘मातृभाषा रत्न’ सम्मान

जहानाबाद ( बिहार )। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (21 फरवरी) के अवसर पर शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन, नेपाल द्वारा बिहार के लाल, प्रख्यात साहित्यकार एवं इतिहासकार सत्येंद्र कुमार पाठक को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मानित किया गया है। काठमांडू में आयोजित एक विशेष समारोह में उन्हें ‘मातृभाषा रत्न मानद उपाधि सम्मान से नवाजा गया। श्री पाठक को यह सम्मान उनकी मातृभाषा के प्रति अटूट सेवा और साहित्य, सांस्कृतिक विरासत, पुरातात्विक अनुसंधान एवं कला के क्षेत्र में किए गए उनके उल्लेखनीय कार्यों के मूल्यांकन के आधार पर दिया गया है। मूल रूप से अरवल जिले के करपी निवासी सत्येंद्र कुमार पाठक का कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से जहानाबाद और अरवल रहा है, जहाँ उन्होंने क्षेत्रीय इतिहास और संस्कृति को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।इस उपलब्धि पर फाउंडेशन के अध्यक्ष आनंद गिरी मायालु और चयन समिति की प्रमुख मंजू खरे (दतिया) ने उन्हें हार्दिक बधाई दी है। इसके साथ ही साहित्य और कला जगत की कई गणमान्य हस्तियों ने खुशी व्यक्त की है, जिनमें प्रमुख हैं: साहित्य जगत: डॉ. त्रिलोक चंद (हरियाणा), डॉ. उदारीकरण श्रीवास्तव (मुजफ्फरपुर), रेणु (सीवान), नागेंद्र मिश्र (गया), मोनी मिश्र (रांची), रमेश चंद्र मिश्र एवं मनीषा मिश्रा।दाम्पत्य बचाओ' की ममता कुमारी, 'जीवन धारा नमामि गंगे' (जहानाबाद) के जिलाध्यक्ष अंकित शर्मा, मोहन जी, उज्ज्वल एवं अन्य है ।स्थानीय स्तर पर इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान की खबर मिलते ही जहानाबाद और अरवल के बौद्धिक समाज में हर्ष का माहौल है। लोगों का मानना है कि इस सम्मान से न केवल श्री पाठक का कद बढ़ा है, बल्कि बिहार की साहित्यिक और ऐतिहासिक विरासत को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
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