Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

चलती राहें

चलती राहें

अरुण दिव्यांश
ये चलती हुई राहें ,
सूनसान सा डगर ,
कहीं जाना अंजाना ,
चलती राहें न बहाना ।
ये चलती हुई राहें ,
अनिश्चित सा है दूरी ,
कहाॅं मंजिल अपनी ,
पहचान करना जरूरी ।
भली हो या हो बुरी ,
सबकी अपनी मजबूरी ,
किधर कैसी मेरी राहें ,
आलिंगन को फैलाए बाॅंहें ।
किस राह को इंतजार मेरी ,
कौन सी राह मुझे प्रिय है ,
कहाॅं कौन सी चलती राहें ,
कौन सी राह निष्क्रिय है ।
करें उन राहों से परिचय ,
जो मंजिल तक पहुॅंचा दे ।
वैसा मार्ग है चुनना नहीं ,
हमको जो भी धोखा दे ‌‌।


पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ