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गणतंत्र और अधिकार

गणतंत्र और अधिकार

संजय जैन

इंसान को इंसान ही जानता है
वो ही पहचानता है..2।। 

इंसान की फिदरत को देखो
जो कोई नही पहचानता। 
दूर से तो सब अच्छे लगते 
पर पास से अंतर दिखता। 
इसलिए इंसान को समझ पाना
इंसान के लिए ही मुश्किल है।
यही कहता है संजय..2।। 
इंसान को इंसान ही जानता है
वो ही पहचानता है..।। 

वक्त हमें और आप को 
बहुत कुछ सिखाता है। 
समय समय पर अपनी
उपस्थिति को दर्ज करता। 
लोगों की असली पहचान
गाँधी के विचारों से कराता। 
और भारत के गणतंत्र को 
हम सब को समझता।
यही कहता है संजय...।। 

इंसान का इंसान ही दोस्त
और दुश्मन बड़ा होता है। 
जो अपने अपने रूपो को
समयानुसार दिखता है। 
फिर भी हम सबको हमारा 
संविधान एक सूत्र में बांधता है। 
जिसके कारण हमारे मन में
भाव समानता का आता है।
यही कहता है संजय..2।। 

इंसान हो तो इंसान बनो
कद्र इंसानियत की करो। 
सुख दुख के साथी बनो
व्यवहार अच्छा रखो। 
मिलने मिलाने में विश्वास करो
गाँधीगिरी का करो अनुसरण। 
सभ्य समाज का करो निर्माण 
गणतंत्र को हृदय में रखो।
यही कहता है संजय...2।। 
इंसान को इंसान ही जानता है
वो ही उसे पहचानता है..।।

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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