रामकथा युगों युगों से भारतीय संस्कृति को प्राण देती आयी है

- चित्रकूट में आयोजित 'राष्ट्रीय रामायण मेला' में विद्वत-सभा की अध्यक्षता करते हुए डा अनिल सुलभ ने कहा
चित्रकूट। २० फ़रवरी। राम के व्यक्तित्व की दिव्यता और रामकथा युगों युगों से भारतीय संस्कृति को प्राण देती आयी है। राम का चरित्र ही नहीं राम-कथा का प्रत्येक पात्र मानव-जीवन का आदर्श है। रामायण और रामचरित मानस ऐसे ग्रंथ हैं, जिनके प्रणयन से दो पैर के प्राणी'मनुष्य' बनते हैं। ये महाकाव्य विश्व मानवता के लिए वरदान हैं।

यह बातें चित्रकूट धाम में विगत ५३ वर्षों से प्रत्येक वर्ष आहूत हो रहे पाँच दिवसीय 'राष्ट्रीय रामायण मेला' के चौथे दिन एक विद्वत-सभा की अध्यक्षता करते हुए, बिहार हिन्दी साहित्य साम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि 'राम-कथा' कोई गढ़ी हुई कथा नहीं,प्राच्य-भारत का एक अत्यंत प्रेरणा दायी इतिहास है। राम का चरित्र स्वयं एक सुंदर कविता की तरह आकर्षण का केंद्र है। कोई ईश्वर-वादी हो या 'अनीश्वर-वादी' , रामकथा में सभी मतों के व्यक्तियों के लिए पर्याप्त विषय हैं। इस कथा में मानव जीवन के प्रत्येक विषय को स्पर्श ही नहीं किया गया है, सबका प्रतिपादन भी हुआ है। इसमें जिज्ञासु-मन में उठने वाले सभी प्रश्नों के उत्तर और जीवन की सभी समस्याओं के निदान हैं। यह जीवन-मार्ग का प्रकाश-स्तम्भ है।
महान समाजवादी चिंतक डा राम मनोहर लोहिया की प्रेरणा से वर्ष १९७३ से आरंभ हुए इस 'रामायण मेला' को रामकथा और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक फैलाने का महान उपक्रम बताते हुए डा सुलभ ने मेला समिति के महामंत्री डा करुणा शंकर द्विवेदी, करवरिया कुटुम्ब और डा चंद्रिका प्रसाद दीक्षित 'ललित' समेत मेला के आयोजकों के कार्यों की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
इस विद्वता-सभा में सुल्तानपुर के विश्रुत मानस-मर्मज्ञ और विद्वान साहित्यकार डा सुशील पांडेय 'साहित्येन्दु', डा हरि प्रसाद दुबे, प्रो जंग बहादुर पाण्डेय, आचार्य रामलाल द्विवेदी, राम लोचन तिवारी, डा संजय पंकज, डा छेदीलाल कांस्यकार, राम प्रताप शुक्ल, सुरेंद्र सिंह, डा विमल कुमार परिमल आदि दर्जनों विद्वानों ने रामकथा के विविध प्रसंगों पर अपने विद्वतापूर्ण विचार व्यक्त किए। मंच का मनोहर संचालन, रामायण मेला का आरंभ से संचालन करते आ रहे विद्वान साहित्यकार डा चंद्रिका प्रसाद दीक्षित 'ललित' ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन मेला समिति के वयोवृद्ध महामंत्री डा करुणा शंकर द्विवेदी ने किया। समिति के युवा कार्यवाहक अध्यक्ष प्रशांत करवरिया, जिनके पितामह स्वर्गीय गोपाल कृष्ण करवरिया और पिता स्वर्गीय राजेश करवरिया मेला के आरंभ से यह कर्तव्य निभाते आ रहे थे, ने विद्वान अतिथियों और सैकड़ों की संख्या में उपस्थित दूर-दूर से आए रामकथा-प्रेमियों का अभिनन्दन किया।
इस अवसर पर, जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्व विद्यालय के हिन्दी विभाग की पूर्व अध्यक्ष डा किरण त्रिपाठी, कवि डा संतोष कुमार मिश्र, डा घनश्याम अवस्थी, राजाबाबू पांडेय, डा विनोद शंकर सिंह, डा शांत कुमार चतुर्वेदी, डा अनुपम, राजेश दुबे, मनोज गर्ग, सत्येंद्र पाण्डेय, मो युसुफ़, मो इम्तियाज़, राजेंद्र मोहन त्रिपाठी, नत्थू प्रसाद सोनकर, दद्दू महाराज आदि मेला समिति के अधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे। संध्या में भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हुईं, जिनमें दिल्ली के वृजभान फ़ाउंडेशन द्वारा सुप्रसिद्ध नृत्यांगना डा अनु सिन्हा के निर्देशन में प्रस्तुत 'कृष्ण नृत्य-नाटिका' को श्रोताओं का विशेष प्रेम और उत्साह प्राप्त हुआ।
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