100 साल के 'शतकवीर बाबा' ने जगाई संयुक्त परिवार की अलख, परपोती की शादी में दिखा 100 सदस्यों वाले कुनबे का प्रेम

नवादा में रहने वाले 'शतकवीर बाबा' ने अपने परिवार को एकजुट रखने का एक अद्भुत उदाहरण पेश किया है। उनकी उम्र 100 साल है, लेकिन उन्होंने अपने परिवार के बंधन को मजबूत रखने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है।
हाल ही में, उनकी परपोती की शादी में लगभग 100 सदस्यों वाले उनके कुनबे का प्रेम और एकजुटता देखने को मिली। यह एक दुर्लभ दृश्य है, जो आज के समय में संयुक्त परिवार की महत्ता को दर्शाता है।
'शतकवीर बाबा' की यह पहल न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा है। यह दिखाता है कि अगर हम अपने परिवार के साथ मिलकर रहते हैं और एक दूसरे का सम्मान करते हैं, तो हमारे रिश्ते और भी मजबूत हो सकते हैं।
उनकी यह अनोखी पहल आज के समय में एक मिसाल है, जब अक्सर परिवार के सदस्य अलग-अलग शहरों या देशों में रहते हैं और एक दूसरे से दूर होते जा रहे हैं। 'शतकवीर बाबा' की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि परिवार का महत्व कितना अधिक है और हमें इसकी कद्र करनी चाहिए।
यह एक प्रेरक कहानी है जो हमें अपने परिवार के साथ जुड़ने और उनके साथ समय बिताने के लिए प्रेरित करती है। 'शतकवीर बाबा' की यह पहल हमारे समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है और लोगों को अपने परिवार के साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।
नवादा (मेसकौर): आजकल की आधुनिक दुनिया में और एकल परिवारों के बढ़ते चलन के बीच, बिहार के नवादा जिले से एक बहुत ही सुखद और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। नवादा जिले के मेसकौर प्रखंड में स्थित अरण्यडीह गांव में हाल ही में एक विवाह समारोह हुआ, जो न केवल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि यह एक मिसाल भी बन गया है जो समाज के लिए बहुत प्रेरणा देने वाला है।
यह विवाह समारोह वयोवृद्ध उपेन्द्र मोहन मिश्र की परपोती स्वीटी कुमारी का था, जिन्हें लोग प्यार से 'शतकवीर बाबा' कहते हैं। यह घटना न केवल एक खुशनुमा पल है, बल्कि यह हमें दिखाती है कि परिवार का महत्व और पारंपरिक मूल्यों को कैसे बनाए रखा जा सकता है।
पांच पीढ़ियों का अनूठा संगम
इस शादी की सबसे अच्छी बात यह थी कि उपेन्द्र मोहन मिश्र जी ने न सिर्फ इसमें हिस्सा लिया, बल्कि उन्होंने पूरे आयोजन को बहुत ही अच्छी तरह से संभाला भी। उनकी उम्र 100 साल से ज्यादा हो चुकी है, फिर भी उन्होंने बहुत ही उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। लोगों ने बताया कि उनके बेटे, बहुएं, पोते-पोतियां और परपोते भी इसमें शामिल हुए। उनका पूरा परिवार, जिसमें 100 से ज्यादा लोग थे, इस खुशी में एक साथ आया था।
रात भर जगकर निभाया अभिभावक का दायित्व
आज के समय में युवा जल्दी थक जाते हैं, लेकिन शतकवीर बाबा ने अपनी उम्र में भी सबको आश्चर्यचकित कर दिया। उन्होंने पूरी रात जागकर वैवाहिक समारोह को व्यवस्थित रूप से पूरा किया और आने वाले मेहमानों का स्वागत अपनी देखरेख में करवाया। गांव के लोगों के अनुसार, बाबा का अनुशासन और प्रेम ही कारण है कि आज के समय में भी उनका इतना बड़ा परिवार एकजुट है।
बाबा का आशीर्वाद जाति और धर्म से परे है। यह एक ऐसी शक्ति है जो सभी को समान रूप से प्राप्त होती है, चाहे वे किसी भी जाति या धर्म से संबंधित हों। बाबा का आशीर्वाद लोगों को एकजुट करने और उनके बीच की दूरियों को मिटाने का काम करता है। यह एक ऐसा प्रेम और करुणा का संदेश है जो सभी के दिलों को छू जाता है। जब हम बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, तो हमें यह एहसास होता है कि हम सभी एक ही मानव परिवार का हिस्सा हैं और हमें एक दूसरे के प्रति प्रेम और सहानुभूति का भाव रखना चाहिए। बाबा का आशीर्वाद हमें जीवन के संघर्षों का सामना करने की शक्ति और साहस देता है, और हमें यह याद दिलाता है कि हम कभी भी अकेले नहीं हैं।
अरण्यडीह गांव में ही नहीं, बल्कि आसपास के सभी क्षेत्रों में भी लोग बाबा की बहुत इज्जत करते हैं। गांव के निवासी विजय कुमार मिश्र और संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि चाहे कोई भी हो, चाहे किसी भी जाति या धर्म से ताल्लुक रखता हो, वह अपने अच्छे कामों में बाबा का आशीर्वाद जरूर लेता है। जो भी बाबा के पास जाता है, वह कभी निराश नहीं होता और खाली हाथ नहीं लौटता।
विकास और एकजुटता के प्रेरणापुंज
गांव के प्रतिष्ठित लोगों ने बाबा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इनमें चंद्रमौली मांझी, विष्णुकांत मिश्र, गणेश साव, बैजनाथ चौधरी, और मालती देवी शामिल थे। उन्होंने कहा कि बाबा सिर्फ एक वृद्ध व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे हमारे गांव के विकास और एकता के मार्गदर्शक हैं। उनके परिवार का एकजुट रहना हमारे क्षेत्र के अन्य परिवारों के लिए एक बड़ा सबक है।
पूरे क्षेत्र के लोगों ने भगवान से बाबा के और भी अधिक दीर्घायु और स्वस्थ होने की कामना की है, ताकि उनका मार्गदर्शन समाज को निरंतर मिलता रहे।
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