नया UGC कानून – एक प्रश्न
✍️ डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"क़लम पर पहरा, प्रश्नों पर रोक,
कैसी यह शिक्षा, कैसा यह लोक?
ज्ञान को बाँधो नियम–डोर में,
तो कैसे जागे दीपक भोर में?
विश्वविद्यालय केवल ईंट नहीं,
विचारों की होती है जीवित मणि।
यहाँ शासक नहीं, विवेक चले,
यहाँ सत्य सवालों से ही फले।
जब पाठ्यक्रम सत्ता लिखवाए,
जब कुर्सी विद्या पर हुक्म चलाए,
तब छात्र नहीं, बस संख्या रहें,
न मौलिक सोच, न स्वप्न बहें।
यूजीसी का अर्थ था मार्गदर्शन,
अब क्यों लगे नियंत्रण का शासन?
स्वायत्तता छीनी, संवाद रुका,
क्या यही है शिक्षा का भविष्य लिखा?
गुरु की वाणी, शोध की उड़ान,
इन पर क्यों रखी जाए लगाम?
कानून अगर प्रश्न से डरे,
तो राष्ट्र का भविष्य कैसे बढ़े?
हम विरोध नहीं, हम संवाद चाहते,
हम आज़ादी में ज्ञान सजाते।
नए नियम हों, पर विवेक सहित,
न शिक्षा बने आदेशों की क़ैद।
उठो विद्यार्थी, उठो आचार्य,
यह समय है माँगे प्रश्नाचार्य।
क़ानून बदले, पर सोच न मरे,
भारत तभी विश्व–पथ पर चढ़े।
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