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जिंदगी की दास्तान

जिंदगी की दास्तान

संजय जैन

दास्तान-ए जिंदगी की।
व्यां कर रहा हूँ।
राज-ए जिंदगी के।
कुछ बता रहा हूँ।।

जिंदगी का एहसान बंध हूँ।
जो जीकर चुकाये जा रहा हूँ।
जंग-ए जिंदगी की लड़ें जा रहा हूँ।
और कामयाबी को खोज रहा हूँ।।

सफलता मिले या न मिले।
पर मेहनत तो करवाया है।
और खुदकी करनी का भी।
फल प्राप्त करवाया है।।

जिंदगी जीने की रवायत है।
हमारी भी कुछ शिकायतें है।
देखकर जो अनदेखा करते है।
ऐसे लोग खुदगर्ज होते है।।

न वो अपने होते है न पराये।
वो तो दौलत के भूखे होते है।
इसलिए दुनिया में ऐसे लोग
इस युग में बहुत मिलते है।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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