पटना उच्च न्यायालय की वरिष्ठ महिला अधिवक्ता श्रीमती छाया मिश्रा ने मंगलवार को राज्य में ग्राम न्यायालयों की तत्काल स्थापना की मांग की।

उन्होंने केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल और बिहार के कानून मंत्री संजय कुमार सिंह को अलग-अलग पत्र लिखकर कहा कि निचली न्यायपालिका में लाखों मामले लंबित होने के कारण ग्राम न्यायालय समय की आवश्यकता बन गए हैं।
उन्होंने स्मरण कराया कि 2 अक्टूबर 2009 से ग्राम न्यायालय अधिनियम लागू है, जिसके तहत पंचायतों के समूहों के लिए ग्रामीण अदालतों की स्थापना का प्रावधान किया गया है, जिन्हें दीवानी और न्यायिक अधिकार क्षेत्र प्राप्त हैं। इन अदालतों से न्याय प्रणाली तक त्वरित और सरल पहुंच सुनिश्चित करने की अपेक्षा की गई थी।
हालांकि, वित्तीय बाधाओं, वकीलों और न्यायिक अधिकारियों की आपत्तियों के कारण इस अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सका। आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, जहां 5,000 ग्राम न्यायालय स्थापित करने की योजना थी, वहां केवल 300 कार्यरत हैं और बिहार में एक भी नहीं है।
अधिनियम के अनुसार, ग्राम न्यायालयों की अध्यक्षता प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी करेंगे, जिन्हें दीवानी और आपराधिक दोनों प्रकार के विवादों की सुनवाई का अधिकार होगा।
इन ग्रामीण अदालतों को त्वरित न्याय, सुलह और समझौते को बढ़ावा देने के लिए प्रतिदिन कार्यवाही संचालित करने का अधिकार भी दिया गया है।
श्रीमती छाया मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के वादकारियों को राहत मिलेगी क्योंकि उनका समय और धन दोनों बचेंगे तथा 5,000 से अधिक विधि स्नातकों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
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