रमाभूमि
अरुण दिव्यांशधरापुत्री रमाभूमि जहाॅं पे ,
बिहारी जहाॅं जहाॅं बसा है ।
संस्कृति उस माॅं का रग में ,
जन जन में श्रीराम नशा है ।।
धरा वही जहाॅं जन्मे भिखारी ,
दिनकर रेणु नेपाली कवि हैं ।
विद्यापति बाणभट्ट बेनीपुरी ,
भारतीय बिहारी ये छवि हैं ।।
बिहार के महानतम मानव ,
राजेंद्र चाणक्य श्रीकृष्ण हैं ।
जयप्रकाश गुरुगोविंद सिंह ,
अनुग्रह नारायण विभूति हैं ।।
भारत देश तन है जहाॅं पर ,
बिहार तन का हाड़ रीढ़ है ।
हाड़ पर ही मांस नश चर्म ,
जिसपर तन टीका सुदृढ़ है ।।
मोदी अनुकरण विदेश करे ,
नीतीश अनुकरण प्रांत है ।
आर्थिक दृष्टि भले पिछड़ा ,
प्रेम व्यवहार में संभ्रांत है ।।
बिहारी ऋषि मुनि हैं जन्मे ,
शृंगि अत्रि पुलस्त्य वशिष्ठ ।
गौतम कपिल कश्यप पुल: ,
जमदग्नि भारद्वाज शिष्ट ।।
अंगिरा पुलस्त्य और क्रतु: ,
सुविख्यात हुए थे बिहारी ।
चल पड़े हैं विकास वैभव ,
देख बिहार की लाचारी ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।
शब्दार्थ : जहाॅं = संसार ,
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