कुंडलपुर के बड़े बाबा
संजय जैनतुम मुझे भूला ना पाओंगे।
हाँ तुम विद्यागुरु को भूला ना पाओंगे।
जब कभी भी तुम आओगे कुंडलपुर।
बड़े बाबा के दर्शन कर धन्य पाओगें।
हाँ तुम विद्यागुरु को भूला ना पाओंगे।
हो तुम मुझे यूँ।।
वो बहारे वो चाँदनी रातें
हमनें देखी थी जो गुफ़ाये।
वो बहारे वो चाँदनी रातें
हमनें देखी थी जो गुफ़ाये।
उन नजरों की याद आयेगी
जब ख्यालों में बड़े बाबा को लाओगें।
हाँ तुम विद्यागुरु को भूला ना पाओगें।
हो तुम मुझे यूँ।।
मेरे हाथो में बाबा की प्रतिमा थी।
कोई अदृश्य शक्ति वहा आ गई थी।
बड़ा चमत्कार वहाँ हो रहा था।
जिससे बाबा मन्दिर में विराजमान हुए।
और सहारा लिया था साधना का
उस दिनको किस तरह भूलाओगें।
हाँ तुम विद्यागुरु को भूला ना पाओंगे।
हो तुम मुझे यूँ।।
दर्शन किये बिना यकीन ना था।
वो दौर कैसा क्या गुजरा है।
जब छोटी सी गुफा में बाबा।
दर्शन देते थे अपने भक्तों को।
झूठ लगे तो इतिहास पढ़ लो।
अब नये मन्दिर में बाबा विराजमान है।
हाँ तुम विद्यागुरु को भूला ना पाओंगे।
जब कभी भी सोचोगें तुम यह घटना।
तो अतिशय तुम इसको मानोगें।
हाँ तुम विद्यागुरु को भूला ना पाओंगे।
हो तुम मुझे यूँ।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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