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कोलंबो में कवयित्री : डॉ. उषाकिरण 'भारत-श्रीलंका साहित्य गौरव' से सम्मानित

कोलंबो में कवयित्री : डॉ. उषाकिरण 'भारत-श्रीलंका साहित्य गौरव' से सम्मानित

मुजफ्फरपुर।। निज प्रतिनिधि साहित्य और कला संस्कृति के क्षेत्र में मुजफ्फरपुर की विशिष्ट पहचान रखने वाली डॉ. उषाकिरण श्रीवास्तव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का मान बढ़ाया है। श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित एक भव्य समारोह में उन्हें 'भारत-श्रीलंका साहित्य गौरव सम्मान' से विभूषित किया गया। यह सम्मान उन्हें पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, शिलांग द्वारा स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र (भारतीय उच्चायोग), कोलंबो में आयोजित 'लेखक मिलन समारोह' के दौरान प्रदान किया गया। विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में भारत और श्रीलंका के कई दिग्गज साहित्यकारों ने शिरकत की। डॉ. उषाकिरण श्रीवास्तव, जो स्वर्णिम कला केंद्र की अध्यक्षा और जीवनधारा नमामि गंगे की बिहार राज्याध्यक्ष हैं, को उनके निरंतर साहित्यिक अवदान और सांस्कृतिक गतिविधियों के कुशल नेतृत्व के लिए चुना गया। वर्तमान में वे कला संस्कृति आचार्यकुल की राष्ट्रीय प्रभारी के रूप में भी देश भर में कला के संरक्षण का कार्य कर रही हैं। सम्मान ग्रहण करने के पश्चात डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि साहित्य और संस्कृति किसी भी देश की सीमाओं को जोड़ती है। कोलंबो में मिला यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रति वैश्विक प्रेम का प्रतीक है। आयोजन के संयोजक डॉ. अकेला भाई ने डॉ. श्रीवास्तव के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु बताया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर मुजफ्फरपुर सहित देश के विभिन्न हिस्सों से साहित्यकारों ने उन्हें बधाई दी है। हर्ष व्यक्त करने वालों में: वरिष्ठ साहित्यकार सत्येन्द्र कुमार पाठक लेखक मिलन समारोह के संयोजक डॉ. अकेला भाई डॉ. संगीता सागर, सुभाषिनी, अंकुर और अन्य गणमान्य लेखक शामिल हैं। सभी ने एक स्वर में कहा कि डॉ. उषाकिरण की यह उपलब्धि बिहार के साहित्यिक जगत के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।
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