खुदसे दूर हुआ
संजय जैनकैसे व्यां करे अपने आपको
जो खुद से ही बहुत दूर है।
बहुत सहारा था उनका
जब वो साथ में थे।
अब तो दूरियाँ इतनी है
जितना दिलने समझा नही।
क्या सोचा था क्या हो गया
जीते जी खुदसे जुदा हो गया।।
अंतर आत्मा क्या कहती है
जो सब को झकझोरती है।
जिससे दिल पिघलता है
तो किसी का जम जाता है।
पर आत्मा पर असर तो
हर किसी के अंदर होता है।
इसलिए लोगों की जिंदगी
बनती और बिगड़ती है।।
बहुत सुना था लोगों से
की दिल दुख-दर्द सहता है।
जो इंसान को इंसान और
कभी हैवान भी बनता है।
जो सयंम और धैर्य धारण
अपने जीवन में करते है।
तकदीर उनकी निश्चित ही
एक दिन बदलती है।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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