"स्मृति, शब्द और जीवन की त्रिवेणी"
पंकज शर्मा
अच्छी भूमिका, अच्छे लक्ष्य एवं श्रेष्ठ विचार—ये मनुष्य के आचरण को अर्थ देते हैं। भूमिका कर्म का संस्कार है, लक्ष्य चेतना की दिशा, एवं विचार आत्मा की ज्योति। जब ये तीनों समस्वर होते हैं, तब व्यक्ति केवल सफल नहीं, सार्थक होता है। ऐसे लोग समय के पार भी उपस्थित रहते हैं, क्योंकि उनका कर्म क्षणिक नहीं, मूल्यात्मक होता है—जो मन में स्थायी छाप छोड़ता है।
मन स्मृति का मंदिर है, शब्द अभिव्यक्ति की साधना, एवं जीवन प्रयोगशाला। जिनके विचार करुणा, सत्य एवं विवेक से दीप्त होते हैं, वे शब्दों में अमरता पाते हैं एवं जीवन में पाथेय बनते हैं। आध्यात्मिकता उन्हें विनम्र बनाती है, दर्शन उन्हें दूरदृष्टि देता है, एवं साहित्य उन्हें मानवता से जोड़ता है। इसलिए अच्छे विचार अंततः मन, शब्द एवं जीवन—तीनों में जीवित रहते हैं।
. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार) पंकज शर्मा (कमल सनातनी)
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