जाली दस्तावेजों पर अब सख्त कार्रवाई, फर्जीवाड़ा किसी भी कीमत पर नहीं होगा बर्दाश्त
- राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का बड़ा फैसला, अनिवार्य होगी प्राथमिकी
पटना, 03 जनवरी 2026।
भूमि से जुड़े मामलों में जाली और कूटरचित दस्तावेजों के बढ़ते प्रचलन पर बिहार सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। माननीय उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि नामांतरण, दाखिल–खारिज, परिमार्जन प्लस या सरकारी भूमि से जुड़े किसी भी प्रकरण में फर्जी कागजात सामने आने पर अब अनिवार्य रूप से आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी और दोषियों पर कानून का कठोरतम प्रहार होगा।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव गोपाल मीणा ने सभी अंचलाधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि यदि किसी भी भू-राजस्व कार्यवाही में जाली, कूटरचित अथवा मिथ्या दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की बात प्रथम दृष्टया सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 के सुसंगत प्रावधानों के तहत स्थानीय थाना में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाए।
यह निर्देश माननीय उपमुख्यमंत्री की पहल पर चल रहे भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान प्रमंडलीय मुख्यालयों में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रमों में सामने आए गंभीर तथ्यों के बाद जारी किया गया है। विभाग के अनुसार नामांतरण, दाखिल–खारिज, बंदोबस्ती, सीमांकन, भू-अर्जन तथा सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में कई बार फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है, जो गंभीर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व की समीक्षात्मक बैठकों में ऐसे मामले सामने आने के बावजूद कई स्थानों पर अंचल स्तर से प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई, जिसे घोर लापरवाही माना गया है। भविष्य में ऐसे किसी भी मामले को दबाने या टालने को कदाचार माना जाएगा और संबंधित अंचलाधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।
निर्देशों के प्रमुख बिंदु
- सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में संबंधित अंचलाधिकारी स्वयं स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज कराएंगे।
- निजी या रैयती भूमि विवाद में जांचोपरांत अंचलाधिकारी/राजस्व पदाधिकारी की अनुशंसा पर परिवादी के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
- जाली दस्तावेज के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं किया जाएगा। यदि पूर्व में ऐसा आदेश पारित हो चुका है, तो उसकी विधि-सम्मत समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
- प्राथमिकी दर्ज न कराना या संरक्षण देना कर्तव्य में गंभीर लापरवाही माना जाएगा।
विभाग ने इस आदेश की प्रतिलिपि सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्त्ताओं, वरीय पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों एवं भूमि सुधार उप समाहर्त्ताओं को भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
सरकार के इस फैसले से जमीन माफिया, दलालों और फर्जीवाड़ा करने वालों में हड़कंप मच गया है, वहीं आम जनता को भूमि विवादों में न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
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