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मुस्कारा के दीजिये

मुस्कारा के दीजिये

संजय जैन

विवेकानंद जी के शब्दों को
हमने हृदय में शमा रखा है।
जो मेरे जीवन में
बहुत काम आ रहा है।
कितना कुछ कहाँ उन्होंने
मानव जीवन के ऊपर।
करे अगर उनका चिंतन तो
जिंदगी फूलों की तरह खिल जायेगी।।


अगर नहीं है कुछ भी
किसीको कुछ देने को।
तो बस मुस्कारा दीजिये
उसे ही सुकून मिल जायेगा।
और इस उपहार के लिये
वो दुआ तुम्हें दिलसे देगा।
जो जीवन के पथ पर
काम तुम्हारे बहुत आयेगी।।


गरीब लाचार समझ कर
पैसे देने वाले बहुत होते है।
परन्तु जख्मो पर मरहम
लगाने वाले कम होते है।
पैसों से कुछ भी ले सकते हो
पर दर्द किसी का नहीं।
कहे गये मुँह से मीठे शब्द
उसके दर्द को मिटा देगा।।


जिंदगी के सफर में
साथ अपनो का चाहिए।
मुश्किलें जब भी आये
तब हौसले बड़ाने वाले चाहिए।
अपने बनकर काटने वाले
इस संसार में बहुत है।
गैर होकर भी साथ निभाए
ऐसे लोग कम ही होती है।।


ज्योत अगर मानवता की
युवाओ के दिलो में जलाना है।
तो ज्ञान बाँटकर ज्ञान बढ़ाए
न की सीमित उसे रखे।
जो तुम ऐसा कर पाओगे
तो सच्चे गुरु कहलाओगें।
मान पाओगें सम्मान पाओगें
और दिलो में बस जाओगे।।


स्वामी विवेकानंद जी की जयन्ती पर आप सभी को बहुत बहुत बधाई और शुभ कामनाएं उनके विचारो को अपने अंदर उतारे।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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