पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि: जनसेवा की मिसाल थे स्वर्गीय परशुराम चतुर्वेदी जी

बक्सर।
बक्सर की मिट्टी के लाल, जन-जन के नेता, सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी स्वर्गीय परशुराम चतुर्वेदी जी की पुण्यतिथि पर आज उन्हें शत-शत नमन किया गया। उनके अनुयायियों, शुभचिंतकों और क्षेत्रवासियों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि परशुराम चतुर्वेदी जी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि जनसेवा की एक जीवंत सोच थे, जो कभी समाप्त नहीं हो सकती।
स्वर्गीय चतुर्वेदी जी जमीन से जुड़े हुए नेता थे। आम आदमी की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझना उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। लॉकडाउन के कठिन समय का एक प्रसंग आज भी लोगों की आंखें नम कर देता है। परिवार के अनुसार, गांव में रहते हुए एक रात करीब दो बजे किसी जरूरतमंद ने दरवाजा खटखटाया। बिना देर किए परशुराम चतुर्वेदी जी उठे और उस व्यक्ति की समस्या का समाधान किया। आज के दौर में, जब जनप्रतिनिधियों से दिन में भी संपर्क मुश्किल हो गया है, उस समय रात के अंधेरे में आमजन के लिए खड़े रहना उनके समर्पण को दर्शाता है।
जनसेवा उनके जीवन का मूल मंत्र थी। जनवरी की कड़ाके की ठंड में पटना में अंतिम मुलाकात का जिक्र करते हुए उनके परिजनों ने बताया कि रात करीब दस बजे चौसा से सूचना मिली कि किसानों पर लाठीचार्ज हुआ है और उनके साथ बर्बरता की गई है। सूचना मिलते ही वे बिना किसी विलंब के तैयार हुए और उसी रात ट्रेन पकड़कर बक्सर के लिए रवाना हो गए। परिजनों ने उन्हें अगली सुबह जाने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने कहा—
“एक सच्चे जनप्रतिनिधि का जीवन पहले जनता के लिए समर्पित होता है, बाद में वह अपने लिए सोचता है।”
यही शब्द उनकी सोच और संघर्ष का परिचय देते हैं। दुर्भाग्यवश, वही अंतिम मुलाकात सिद्ध हुई। 16 जनवरी 2023 का दिन परिवार और समर्थकों के लिए काला दिन बनकर आया, जब बक्सर से अचानक सूचना मिली कि उनकी तबीयत गंभीर हो गई है और उन्हें हार्ट अटैक आया है। उस समय वे पटना में थे और विषम परिस्थितियों के कारण समय पर पहुंच पाना अत्यंत कठिन हो गया। समुचित प्रयासों के बावजूद, उचित स्वास्थ्य व्यवस्था के अभाव में उनका निधन हो गया।
स्वर्गीय परशुराम चतुर्वेदी जी का पूरा जीवन एक आदर्श की तरह था। उन्होंने कभी पद, सुविधा या निजी स्वार्थ को प्राथमिकता नहीं दी। वे राजनीति को सेवा का माध्यम मानते थे। उनके परिवार का कहना है कि वे उनके जीवन आदर्शों का आज भी अनुसरण कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।
हालांकि, इस बीच एक पीड़ा भी सामने आई है। परिजनों और समर्थकों का कहना है कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया, उसी पार्टी ने उनके बलिदान को भुला दिया। उन्हें और उनके परिवार को जो सम्मान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। यह स्थिति न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि उन सभी कार्यकर्ताओं के लिए भी पीड़ादायक है, जो आज भी उनके सिद्धांतों पर चलने का संकल्प लेते हैं।आज उनकी पुण्यतिथि पर बक्सर समेत पूरे क्षेत्र में यही भावना गूंज रही है कि परशुराम चतुर्वेदी जी जैसे जनसेवक विरले ही जन्म लेते हैं। वे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच, उनके संस्कार और उनका संघर्ष हमेशा लोगों को प्रेरणा देता रहेगा।
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