(मकर संक्रांति _2026)
ये लड़कियां रंग बिरंगी पतंगों सी
कुमार महेंद्रमुक्त आकाश पटल अठखेलियां,
उरस्थ जोश उत्साह उल्लास ।
स्पर्श कामना नवल धवल बिंदु,
लक्ष्य पथ अथाह शौर्य साहस ।
आनंद अनुभूति ऊंचाइयों पट,
पुनीत पावन मस्त मलंगों सी ।
ये लड़कियां रंग बिरंगी पतंगों सी ।।
विपरीत परिस्थिति घोर संघर्ष,
अंतःकरण विजय भव ज्योत ।
आत्म विश्वास सह घनिष्ठ मैत्री,
हाव भाव संचेतना ओतप्रोत ।
निर्वहन निज संस्कृति संस्कार,
सौम्यता इंद्रधनुषी रंगों सी ।
ये लड़कियां रंग बिरंगी पतंगों सी ।।
चितवन काटा मारा शोर परे,
डोर संग आत्मिक भाव ।
नित्य अग्रसर सफलता ओर,
सहन वहन बाधा प्रभाव ।
अंग प्रत्यंग नव ऊर्जा शक्ति,
शत्रु प्रहार कला भुजंगों सी ।
ये लड़कियां रंग बिरंगी पतंगों सी ।।
स्वाभिमान रक्षा प्रयास अथक,
स्नेह प्रेम हित सर्वस्व अर्पण ।
परिवार समाज सम्मान हित,
निज खुशियां आनंद तर्पण ।
आत्मसात आलोचना सराहना,
पर अदम्य उड़ान तरंगों सी ।
ये लड़कियां रंग बिरंगी पतंगों सी ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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