हमारा गणतंत्र सदा महकता रहे
कुमार महेंद्र
सर्वत्र सर्व धर्म समभाव छटा,
परस्पर स्नेह प्रेम भाईचारा ।
स्वस्थ स्वच्छ राष्ट्र तन मन,
अविरल सुख समृद्धि धारा ।
अधिकार पूर्व कर्तव्य बोध ,
नील गगन तिरंगा फहरता रहे ।
हमारा गणतंत्र सदा महकता रहे ।।
वंदन अभिनंदन निज संस्कृति,
गर्व अनुभूत स्वर्णिम इतिहास ।
निर्वहन मर्यादा परंपरा संस्कार,
संबंध पट माधुर्य उमंग उल्लास ।
शिक्षा संग नैतिक पथ प्रशस्त,
समता समानता भाव सहेजता रहे ।
हमारा गणतंत्र सदा महकता रहे ।।
सहर्ष आत्मसात प्रौद्योगिकी,
उपयोग अंतर सतर्कता अहम ।
ज्ञान ध्यान फेक न्यूज डेटा लीक,
गेमिंग सोशल मीडिया अति पैहम।
संतुलित प्रयोग डिजिटल युक्तियां,
अवांछित उपयोग नहकता रहे ।
हमारा गणतंत्र सदा महकता रहे ।।
प्रगति गलियारों अंतर सुरभित ,
सदा भारती आन बान शान ।
वसुधैव कुटुंबकम् भाव प्रसार,
पुनः शोभित विश्व गुरु पहचान ।
स्वाभिमान रक्षा सशक्त राष्ट्र हित,
स्वदेशी प्रोत्साहन चहकता रहे ।
हमारा गणतंत्र सदा महकता रहे ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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