प्रेम और हवस
जय प्रकाश कुवंरवैसे तो बहुत मिलते हैं,
दिल के रास्ते में आने वाले।
पर, बिरले ही मिलते हैं,
दिल से प्रेम निभाने वाले।।
रूप और जवानी क्या देखा,
खींचे चले आते हैं।
शरीर ढलने पर, रूप उजड़ने पर,
बिरले ही कुछ लोग,
प्यार का रिश्ता निभाते हैं।।
जो रूप के जाल में फंस गया,
वो हवस के दलदल में धंस गया।
रूप मायारूपी ठगिनी है,
प्रेम सबसे शुद्ध दिल की अग्नि है।
ये हवस के भुखे लोग,
नारी जीवन को कलंकित करते हैं।
ओछी हरकतों का प्रदर्शन कर,
प्रेमी होने का स्वांग भरते हैं।।
प्रेम और हवस में,
कोई मेल नहीं है।
दिल से आजीवन प्रेम निभाना,
बच्चों का कोई खेल नहीं है।।
जय प्रकाश कुवंर
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com