(मां शाकंभरी प्राकट्य दिवस _2026)
मां शाकंभरी की महिमा अपरंपार
कुमार महेंद्रसुरम्य अरावली वादियों मध्य,
मात शाकंभरी पावन धाम ।
स्थापना युधिष्ठिर कर कमल,
विक्रम संवत 749 श्रेय नाम ।
पौष पूर्णिमा प्राकट्य बेला,
शुभ मंगल दर्शन जयकार ।
मां शाकंभरी की महिमा अपरंपार ।।
मंदिर छटा अद्भुत अनुपम,
रज रज देवत्व परम स्पंदन ।
धर्म आस्था आह्लाद शीर्ष,
जीवन सुरभित सम चंदन ।
धन्य धान्य कृपालु मातु श्री,
वर वृष्टि हरित पोषण शाकाहार ।
मां शाकंभरी की महिमा अपरंपार ।।
ब्राह्मणी रूद्राणी दर्शन रूप,
इतिहास शाक ओतप्रोत ।
देवयुग अकाल परिस्थिति,
मां आशीर्वाद आहार श्रोत ।
अन्य किंवदंती साधना प्रतिफल,
सर्व मनोकामनाएं सहज साकार ।
मां शाकंभरी की महिमा अपरंपार ।।
अवस्थित सीकर सकराय ग्राम,
उदयपुरवाटी समीपस्थ स्थान ।
राष्ट्र प्रमुख सिद्ध शक्ति पीठ ,
खंडेलवाल वैश्य कुलदेवी शान ।
कोटि कोटि धोक मां श्री चरण,
कामना सुख समृद्धि वैभव अपार ।
मां शाकंभरी की महिमा अपरंपार ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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