Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

कारगिल की दुर्गम घाटी में निभाई, शहादत की परिपाटी

कारगिल की दुर्गम घाटी में निभाई, शहादत की परिपाटी

कुमार महेंद्र

जहाँ श्वास भी थम जाती थी,
रक्त शिराओं में जम जाता था।
वहाँ तिरंगे की आन बचाने,
हर वीर हँसकर बढ़ जाता था।
दुश्मन बैठा था ऊँचाइयों पर,
ओढ़े छल-कपट की पाटी।
कारगिल की दुर्गम घाटी में निभाई, शहादत की परिपाटी।।

तोपों की गर्जना गूँज रही थी,
राहें दहकते अंगारों की।
फिर भी थमी न हुँकारें,
उस टोली के रणधीरों की।
वह तोलोलिंग की कठिन चढ़ाई,
वह टाइगर हिल की रण-ललकारी।
कारगिल की दुर्गम घाटी में निभाई, शहादत की परिपाटी।।

भारत माँ के पावन आँचल पर,
बेटों ने शीश चढ़ाया था।
अपने पावन रक्त-समर्पण से,
स्वाधीन चमन महकाया था।
कोई विक्रम बत्रा-सा गरजा,
कोई मनोज पांडे-सा रणधारी।
कारगिल की दुर्गम घाटी में निभाई, शहादत की परिपाटी।।

जून-जुलाई की तपती ऋतु में,
बर्फ़ों पर रक्त बहाया था।
तब जाकर इस पुण्य धरा ने,
विजय-पर्व फिर मनाया था।
उनके साहस, शौर्य, त्याग की,
सदा ऋणी भारत की माटी।
कारगिल की दुर्गम घाटी में निभाई, शहादत की परिपाटी।।

हिमशिखरों पर अमर तिरंगा,
आज भी गर्व से लहराता है।
हर भारतवासी के हृदय में,
उनका यशगान गूँजता है।
युग-युग तक गाएगा भारत,
उनकी अमर बलिदानी थाती।
कारगिल की दुर्गम घाटी में निभाई, शहादत की परिपाटी।।

कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ