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डॉ प्रियदर्शी आलोक बने अखिल भारतीय ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य

डॉ प्रियदर्शी आलोक बने अखिल भारतीय ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य

  • 63 वर्षों में बिहार के पहले चिकित्सक को मिला ऐतिहासिक सम्मान

पटना/भुवनेश्वर।
बिहार के लिए गर्व और गौरव का क्षण तब आया, जब बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरापी एवं ऑक्यूपेशनल थेरापी, विकलांग भवन अस्पताल, पटना के ऑक्यूपेशनल थेरापी विभाग के प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ प्रियदर्शी आलोक को अखिल भारतीय ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट संघ (AIOTA) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य सर्वसम्मति से मनोनीत किया गया। यह सम्मान प्राप्त करने वाले वे 63 वर्षों के इतिहास में बिहार के पहले चिकित्सक हैं।

यह मनोनयन उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय परिसर के सभागार में आयोजित अखिल भारतीय ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट संघ के 63वें राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता AIOTA के अध्यक्ष डॉ पंकज वाजपेई ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि


“प्रौद्योगिकी की परंपरा के साथ मिलकर व्यावसायिक चिकित्सा में सांस्कृतिक विविधता के समन्वय के साथ मरीजों की चिकित्सा करना आज ऑक्यूपेशनल थेरापी का प्रमुख दायित्व है।”

पटना को मिला राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी का गौरव


इस अवसर पर डॉ प्रियदर्शी आलोक ने वर्ष 2027 में अखिल भारतीय ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट संघ का राष्ट्रीय सम्मेलन बिहार की राजधानी पटना में आयोजित कराने का प्रस्ताव रखा, जिसे उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही फरवरी 2027 में होने वाले 64वें राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन सचिव की जिम्मेदारी भी डॉ आलोक को सौंपी गई। यह निर्णय बिहार के ऑक्यूपेशनल थेरापी क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाला माना जा रहा है।

डॉ आलोक के साथ ही दिल्ली में कार्यरत डॉ दुर्गेश पाठक को भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनोनीत किया गया। उल्लेखनीय है कि डॉ दुर्गेश मूल रूप से बिहार के ही निवासी हैं।

त्रिदिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन

9 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित इस त्रिदिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन उड़ीसा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सम्मेलन का संयुक्त आयोजन SV NIRTAR, कटक तथा उड़ीसा ब्रांच ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरापी द्वारा किया गया। आयोजन की कमान डॉ अनुरूपा सेनापति (विभागाध्यक्ष, ऑक्यूपेशनल थेरापी, कटक) के कुशल नेतृत्व में रही, जबकि वैज्ञानिक सत्रों का संचालन डॉ प्रज्ञान सिंह (SV NIRTAR) के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
शोध, सम्मान और नवाचार का संगम

सम्मेलन में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने अपने विचार और शोध प्रस्तुत किए। कुल 58 वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए तथा 5 विशिष्ट विशेषज्ञों ने विशेष व्याख्यान दिए। उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए प्रतिभागियों को प्रथम एवं द्वितीय पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही, उल्लेखनीय कार्य करने वाले ऑक्यूपेशनल चिकित्सकों एवं छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरापी एंड ऑक्यूपेशनल थेरापी, पटना के चिकित्सक डॉ अभय कुमार जायसवाल को बिहार चैप्टर में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतीक चिह्न (मूमेंटो) एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। उनकी अनुपस्थिति में यह सम्मान डॉ प्रियदर्शी आलोक ने ग्रहण किया।

सम्मेलन की थीम और समापन


इस वर्ष के राष्ट्रीय सम्मेलन की थीम
“Tradition of Technology: Embracing Cultural Diversity in Occupational Therapy”
पर आधारित रही, जिसने आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के संतुलन पर विशेष जोर दिया।

सम्मेलन की शुरुआत AIOTA अध्यक्ष डॉ पंकज वाजपेई के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद संघ के सचिव डॉ जोसेफ सन्नी ने AIOTA की गतिविधियों से चिकित्सकों को अवगत कराया। वैज्ञानिक समिति के चेयरपर्सन डॉ प्रज्ञान सिंह ने वैज्ञानिक सत्रों में प्रस्तुत शोध-पत्रों की विस्तृत जानकारी दी। अंत में 63वें राष्ट्रीय सम्मेलन की आयोजन सचिव डॉ अनुरूपा सेनापति ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

बिहार के लिए नई उपलब्धिडॉ प्रियदर्शी आलोक का राष्ट्रीय कार्यकारिणी में चयन न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह बिहार के चिकित्सा एवं पुनर्वास क्षेत्र के लिए एक नया मील का पत्थर है। पटना में प्रस्तावित राष्ट्रीय सम्मेलन से राज्य में ऑक्यूपेशनल थेरापी को नई दिशा और पहचान मिलने की उम्मीद है।

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