भारत का पुनर्जागरण हो रहा, जान लो,
राष्ट्र का फिर उत्थान हो रहा, जान लो।धर्म- कर्म- संस्कार पुनः जागृत हो रहे,
विश्व गुरू भारत पुनः बन रहा, जान लो।
ली अभी अंगड़ाई, तो विश्व हिल गया,
बात मन्दिर की चलाई, जग हिल गया।
भगवे का परचम गगन में छाया देखकर,
राम द्रोहियों का विश्वास हिल गया।
देख भीड़ प्रचंड यहाँ, दुनिया हैरत में है,
महाकुंभ का परचम, संगम भारत में है।
प्रयागराज में आधा भारत हुआ इकट्ठा,
सनातन धर्मी खुश, अधर्मी ग़ैरत में हैं।
सम्पूर्ण विश्व से श्रद्धालुओं का आगमन,
ब्रह्मांड से देवगणों का तीर्थ में पदार्पण।
असुरों का प्रयागराज में आना प्रतिबंधित,
महाकुंभ की पुण्य बेला में सर्वस्व समर्पण।
जाति धर्म की दीवारें बिखर गयी हैं
क्षेत्रवाद की सारी राहें बदल गयी हैं।
धर्म कर्म और मानवता का सैलाब यहाँ,
अलगाववाद की सारी हदें दरक गयी हैं।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
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